NEWS BMF के लिए झारखंड धनबाद से कैमरा मैन राज कुमार शर्मा के साथ ब्यूरो चीफ प्रेम प्रकाश शर्मा की रिपोर्ट।
सिन्दरी, धनबाद। बी.आई.टी.सिंदरी के असैनिक अभियंत्रण विभाग में प्लैटिनम जुबली महोत्सव पर एक्सपर्ट लेक्चर सीरीज का आयोजन आज दिनांक 18/10/2024 को किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ० हरिनारायण तिवारी, प्रबंध निदेशक फ्लडकोन कन्सलटेन्ट एल एल पी, सह सलाहकार पैन डी टी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड रहे।
कार्यक्रम का विषय था ” जल उद्यमिता: संभावनाएँ और आगे का रास्ता”।
कार्यक्रम का शुभारंभ उपस्थित अतिथियों को पुष्प गुच्छ देकर किया गया।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में असैनिक अभियंत्रण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ० जीतू कुजुर ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए आज के कार्यक्रम की रूप रेखा प्रस्तुत की एवं डॉ० तिवारी के तकनीकी क्षेत्र में योगदान से सभी को अवगत कराया।
तत्पश्चात बी०आई०टी० सिंदरी के निदेशक प्रो० (डॉ०) पंकज राय ने मुख्य अतिथि का परिचय कराते हुए स्वागत किया एवं उन्होंने बताया कि, डॉ तिवारी इस संस्थान के 2005 बैच के असैनिक अभियंत्रण के छात्र हैं एवं वो अपने सत्र के दौरान पूरे कॉलेज के टॉपर रहे थे। शुरुआत से ही पढ़ाई के प्रति जज्बा एवं कठिन मेहनत का ही परिणाम है कि आज ये इतने अच्छे पोजीशन कर काबिज हैं।
साथ ही उन्होंने,इस प्रकार का आयोजन निरंतर कराते रहने के लिए असैनिक अभियंत्रण के विभागाध्यक्ष की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में मुख्य अतिथि डॉ हरि नारायण तिवारी ने अपने वक्तव्य की शुरूआत कॉलेज के दिनों को याद करते हुए किया। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे आज जिस स्थान पर हैं, उसमें इस संस्थान का काफी अहम योगदान है। साथ ही उन्होंने जल संरक्षण के बारे में विस्तृत रूप से चर्चा किया। आगे उन्होंने स्लाइड्स के माध्यम से जल उद्यमिता के बारे में बताया, एवं बाढ़ से बचाव के लिए विभिन्न तरीकों पर विस्तार से समझाया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में मुख्य वक्ता को प्रो० प्रफुल्ल कुमार शर्मा ने मोमेंटो दे कर सम्मानित किया एवं धन्यवाद ज्ञापन असैनिक अभियंत्रण विभाग के डॉ० ब्रह्मदेव यादव के द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में असैनिक अभियंत्रण विभाग के सभी स्नातक एवं स्नातकोत्तर के विद्यार्थी सम्मिलित थे।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रो० (डॉ०) उदय कुमार सिंह, डॉ० माया राजनारायण रे, डॉ० निशिकांत किस्कु, डॉ० कोमल कुमारी, डॉ० अभिजित आनंद, प्रो० इक़बाल शेख, प्रो० सरोज मीणा एवं प्रो० प्रशान्त रंजन मालवीय का योगदान रहा।