
केवल कविता नहीं हमारे अन्त: का रोदन है! आत्मा का आक्रोश प्रदूषित वृत्ति का शोधन है!!!!! कविकिंकर
साहित्य समाज का दर्पण भी है!!!!!!और यथार्थ को आदर्श की दिशा दिखाने वाला प्रकाश स्तम्भ भी!!!!!!!! दर्पण के रूप में साहित्य अपने समकालीन समाज के गुण अवगुण को सर्वांगसम सच्चे रूप में तथ्य रूप में प्रतिविम्बित करता है और दिशाबोधक के रूप में वह अवगुण रहित निर्दोष व्यवस्थापरक आदर्श की संकल्पना, प्रारूप प्रस्तुत करता है!!!!!!!! सत्पथ दिखाने वाला प्रकाश स्तम्भ बनता है!!!!!!! अनिंद्य सुंदरी राजकुमारी को देखकर श्री नारद जी जैसे मुनि का मोहविमूढ काम भाव ग्रसित होकर अज्ञानीवत ,


























































