*काशी में सारे नियम कायदे दरकिनार,गुरुकुल के द्वार पर चल रहा नशे का कारोबार*
वाराणसी।पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर शासन द्वारा बनाए गए नियम अक्सर लागू नहीं होते।काशी में कोटपा अधिनियम का मजाक उड़ाया जा रहा है।मंदिरों के पास ही नहीं,बल्कि बेटियों के शिक्षालय के सामने भी देसी शराब की दुकानें खुली हुई हैं।
भेलूपुर के एंग्लो बंगाली कॉलेज के सामने अंग्रेजी शराब की दुकान भी सक्रिय है।स्कूल और कॉलेजों के आसपास गुटखा और पान मसाला की दुकानें आम हो गई हैं।प्रशासनिक अधिकारी इन स्थितियों को देख नहीं रहे हैं,या तो देखना नहीं चाहते हैं।पुलिस भी अनजान बनी हुई है।
महावीर मंदिर के पास कस्तूरबा गांधी बालिका इंटर कॉलेज है, यहां स्कूल के निर्धारित मानक के अंदर ही देसी शराब की दुकान है।यहां से शराब लेकर पीने वाले कभी-कभी मुख्य गेट तक पहुंच जाते हैं।महावीर मंदिर आस्था का केंद्र है और इसके तालाब के कोने पर शराब की दुकान है।विंध्यवासिनी नगर कॉलोनी के लोग भी परेशान हैं।
आबकारी विभाग ने यहां लाइसेंस कैसे जारी किया,यह एक बड़ा सवाल है।भेलूपुर के एंग्लो बंगाली कॉलेज के निकट भी अंग्रेजी शराब की दुकान है,जहां बच्चे स्कूल जाते हैं और नशीले पदार्थों की दुकानें उनके भविष्य के लिए खतरा बन रही हैं। हरिश्चंद्र डिग्री कॉलेज के गेट के निकट गुटखा और पान की दुकानें हैं।
भोजूबीर के यूपी कॉलेज गेट के पास सिगरेट और पान की दुकानें हैं,विद्यापीठ के प्रशासनिक और मुख्य भवन के बीच में भी नशीले पदार्थों की दुकानें हैं,महमूरगंज के कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय से महज 50 से 60 मीटर की दूरी पर गुटखा और पान की दुकानें हैं।
तुलसीपुर के पाणिनी कन्या महाविद्यालय के गेट के पास भी गुटखा की दुकानें हैं,तुलसीपुर के निवेदिता शिक्षा सदन के सामने भी नशीले पदार्थों की दुकानें हैं,संकुलधारा क्षेत्र के प्राइमरी स्कूल के पास भी यही स्थिति है।
बता दें कि केंद्रीय कोटपा अधिनियम सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर रोक,तंबाकू विज्ञापनों पर प्रतिबंध और नाबालिगों को तंबाकू बिक्री निषेध के नियम तय करता है। यह देशभर में लागू है और होटल,रेस्तरां,दफ्तर और पार्क में धूम्रपान को प्रतिबंधित करता है। शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पाद बेचना प्रतिबंधित है। उल्लंघन पर 200 से लेकर 10,000 तक का जुर्माना या जेल की सजा का प्रावधान है।









