एटा,माननीय जनपद न्यायाधीश महोदय ,और उच्च न्यायालय में मॉनिटरिंग कर रहे अधिकारियों ,का ध्यान जनपद न्यायालय एटा के बाद कारियों की, समस्या की ,ओर दिलाना चाहूंगा, यह समस्या बदकारियों के साथ अधिवक्ता गण की भी है, क्योंकि हमारी जूनियर डिवीजन, सीनियर डिवीजन ,एसीजेएम ,आदिअपर न्यायालयो में, इतने मुकदमें रोजाना लिस्ट होते हैं, कि वहां भीड़ कोर्ट रूम में बुरी तरह से भरी होती है,। क्योंकि जो प्रैक्टिकल समस्या है, वह यह है की आवाज मुकदमा की सुनवाई के समय ,अर्दली पीठासीन अधिकारी के बराबर में ही खड़े होकर खुद ,फाइल पेश करता है ,और वही आवाज लगाता है ,न्यायालय कक्ष के बाहर अगर कोई बादकारी, बैठा हुआ है ,तो वह अपनी आवाज नहीं सुन सकता ,और उसकी गैरहाजरी नोट कर दी जाती है ,तथा मुकदमे में विपरीत आदेश हो जाता है। दूसरी समस्या तारीख लगने की है। पीठासीन अधिकारियों का बैठने का समय नियत होता है ,और उस निश्चित अवधि में अगर वह सही प्रकार से, न्यायिक सिद्धांतों का पालन करते हुए, कार्य करें तो 10 ,12 ,15 फाइलों में ही पूरे दिन सही प्रकार कार्य कर सकते हैं, लेकिन इन न्यायालय में 200 ,200, २५० पत्रावलियां रोजाना लगती है, अनावश्यक रूप से बाद कारियों को, अधिवक्ताओं को, परेशानी होती है,इस समस्या की ओर,यदि कोई न्याय प्रिय समाधान संभव हो, तो अवश्य किए जाने की गुजारिश में माननीय उच्च न्यायालय में मौजूद जिम्मेदार अधिकारियों से करूंगा।








