शाहजहांपुर: SOG की दबंगई पर पत्रकारों का फूटा गुस्सा, SP को झुकना पड़ा*   *”मैं जिम्मेदार हूं” – SP सौरभ दीक्षित बैकफुट पर, रिपोर्ट राहुल गुप्ता

*शाहजहांपुर: SOG की दबंगई पर पत्रकारों का फूटा गुस्सा, SP को झुकना पड़ा*

*”मैं जिम्मेदार हूं” – SP सौरभ दीक्षित बैकफुट पर*

*SOG टीम सस्पेंड करने की मांग, विकास भवन में घंटों चला हंगामा*

 

*शाहजहांपुर, 25 जुलाई 2026*

उत्तर प्रदेश की सत्ता का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों पर शाहजहांपुर पुलिस की बेलगाम कार्रवाई भारी पड़ गई। *SOG की टीम* ने बिना किसी सबूत के टीवी चैनल के दो पत्रकारों को उठाकर कई घंटे तक हिरासत में रखा। इसके बाद SP की खराब भाषा शैली ने आग में घी डालने का काम किया। नतीजा – पत्रकार सड़कों पर उतरे और SP को विकास भवन में आकर माफी के लहजे में बात करनी पड़ी।

 

*क्या हुआ था मामला?*

कल शाम *चिनौर रोड* पर बाइक से जा रहे *टीवी चैनल के पत्रकार प्रभाकर मिश्रा और विशेक मिश्रा* को SOG की टीम ने रोक लिया और बिना बताए अपने साथ ले गई। आरोप था कि उन्होंने डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के काफिले में काले झंडे दिखाने का वीडियो वायरल किया है।

 

घंटों तक पुलिस ने मीडिया को अंधेरे में रखा। जब इसकी भनक लगी तो पत्रकार संगठनों में खलबली मच गई। भारी विरोध के बाद कोई साक्ष्य न मिलने पर SOG को दोनों पत्रकारों को छोड़ना पड़ा।

 

*SP के शब्दों से भड़के पत्रकार*

जब पत्रकारों ने SP *सौरभ दीक्षित* से जानकारी मांगी तो जवाब में उन्हें खराब भाषा शैली सुननी पड़ी। बस फिर क्या था – आक्रोश फूट पड़ा।

 

आज सुबह तमाम पत्रकार संगठनों ने *प्रेस क्लब* में बैठक कर पैदल मार्च करते हुए *कलेक्ट्रेट* का घेराव किया। पत्रकार सीधे *विकास भवन के मीटिंग हॉल* पहुंच गए, जहां मंत्री की बैठक होनी थी। नारेबाजी हुई – _”जब तक SP खुद नहीं आएंगे, कोई बाहर नहीं जाएगा।”_

 

*SP बैकफुट पर, मानी गलती*

बढ़ते हंगामे के बाद *SP सौरभ दीक्षित* को मीटिंग हॉल में आना पड़ा। पत्रकारों के साथ कई घंटे तक वार्ता चली।

 

SP ने कहा – _”पत्रकारों के साथ जो घटना घटी उसके लिए मैं जिम्मेदार हूं। आगे से ऐसी स्थिति नहीं आएगी।”_

 

पत्रकारों ने *SOG प्रभारी व पूरी टीम को तत्काल सस्पेंड* करने की मांग की। इस पर SP ने कहा – _”ज्ञापन की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।”_

 

*पत्रकार बोले – प्रेस की आजादी पर हमला बर्दाश्त नहीं*

पत्रकारों का कहना है कि लोकतंत्र में मीडिया की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। बिना FIR, बिना साक्ष्य के पत्रकारों को उठाना सीधे-सीधे प्रेस की आजादी पर हमला है।

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