*पचड़े में फंसी पिलुआ पुलिस*
*दलित पत्रकार एवं पत्नी से अभद्रता अमानवीयता मामले में पाँच के खिलाफ मुकदमा*

*पीड़िता ने ली न्यायालय की शरण मनमानी एवं दलित उत्पीड़न जैसे कानूनी पचड़े में फँसी पिलुआ पुलिस, न्यायालय ने लिया संज्ञान*
-बबलू चक्रवर्ती
एटा । प्रेस और पुलिस का रिश्ता चोली दामन का साथ होता हैं, यह कहना रहता हैं पुलिस का, लेकिन पुलिस का यह दावा खोखला ही नहीं बल्कि सफेद झूठ और खुला धोखा हैं जो सिर्फ मतलब के समय स्तेमाल किया जाता हैं, बाकी तो ड्यूटी और फर्ज के प्रति समर्पित रहने की शपथ संकल्प लेकर वर्दी धारण करने वाली पुलिस क्या गुल खिलाती हैं, यह शायद ही किसी से छुपा हो अन्यथा जगजाहिर हैं कि पुलिस फर्ज और जिम्मेदारियों के प्रति किस तरह खरा उतरती हैं ? हालांकि इसका एक ताजा नमूना भी प्रकाश में आया हैं । पुलिस कार्यालय पर मिले पीड़ित परिवार के आरोप के अनुसार स्थानीय दबंगों के अत्याचार और थाना पिलुआ पुलिस की मनमानी से पीड़ित परिवार ने न्याय को दरदर भटकने के बाद मा. न्यायालय की शरण ली और पिलुआ पुलिस पर 24 घँटे से अधिक समय तक अबैध हिरासत में रखने और रिश्वत लेकर छोड़ने जैसे तमाम आरोप लगाये हैं । इस प्रकरण को लेकर पुलिस महकमे में हड़कम्प मच गया और मुकदमे दर्ज कर तीव्रगति से जाँच भी होने लगी ….
*दबंगों की दबंगई और पुलिस की मनमानी की कहानी से सम्बंधित शेष खबर का खुलासा









