*कानपुर उत्तर प्रदेश से एक बड़ी न्यूज आ रही है कि हल्दी की जगह चावल और कुछ अन्य केमिकल से नकली मिलावटी हल्दी तैयार हो रही थी.*
तो हमें लगता है ऐसी मिलावटी फैक्ट्री सिर्फ कानपुर में ही नहीं बल्कि पूरे देश में बहुत जगह चल रही होगीं, बस कुछ पकड़ में आ जाती हैं कुछ बच जाती हैं, और ये कार्यक्रम निरंतर चलता रहता है.
हल्दी उगाना कोई बहुत बड़ा काम नहीं है, खेतों में भी आसानी से उग जाती है, और जो शहर कस्बे में लोग रहते हैं उनके गार्डन या छात्रों पर भी आराम से लग सकती है ग्रो बैग या क्यारी में..
पेड़ पौधों के नीचे छाया वाली जगह भी बहुत आसानी से उग जाती है और अच्छी होती है.
पिछले कई वर्षों से हम अपने बगीचे के नीचे छाया वाली और खुली जगह में हल्दी उगाते हैं. और फिर उसको प्रोसेस कर हल्दी चिप्स और पाउडर बना लेते हैं.
और सिर्फ हम ही नहीं, कानपुर के आसपास के कुछ और अन्य किसान साथी हैं जो हल्दी उगाते हैं अपने घर परिवार के लिए और जो बच जाती है वह फिर अन्य लोगों के लिए हो जाती है.
ऐसे लोग ज्यादातर कोई बहुत बड़ा प्रचार प्रसार नहीं करते, बस आराम से अपना काम करते रहते हैं, उन लोग उनसे जुड़ते रहते हैं और एक दूसरे का सहयोग होता रहता है।
सिर्फ 10×10 के एरिया में यदि हल्दी बो दी जाए तो भी एक परिवार के लिए बहुत हो जाएगी यानी पूरे वर्ष का इंतजाम.
मई, जून में ज्यादातर हल्दी लगाई जाती है, कच्ची हल्दी ही बीज होता है, 10, 11 महीने में हल्दी बढ़िया हो जाती है.
इसे जानवर भी नहीं खाते, खुले एरिया में लगाइए धूप वाली जगह में या छाया वाली जगह में हल्दी सब जगह हो जाएगी.
10, 11 महीने बाद इसमें अच्छी क्वालिटी आ जाती है, आप इसको निकाल कर दो तरीके से प्रॉसेस कर सकते हैं.
1. कच्ची हल्दी निकालने के बाद इसको आप उबाल ( boil) कर सकते हैं. और फिर सुखाकर हल्दी पाउडर बनाकर उपयोग में ले सकते हैं.
2. दूसरा तरीका आप कच्ची हल्दी को चिप्स बना सकते हैं आलू की तरह, और फिर इसे सुखा सकते हैं, उसके बाद भी पाउडर बना सकते हैं.. यह भी तरीका हो सकता है, जो हल्दी उबाली जाती है उसकी सेल्फ लाइफ चिप्स वाले से थोड़ा ज्यादा होती है.
सिर्फ पैसे के दम पर, जरूरी नहीं की आपको शुद्ध और अच्छी क्वालिटी का खाने पीने वाला सामान मिल जाए, इसके लिए खुद उगना होगा या फिर अपने आसपास के उन किसानों से जुड़ना होगा जो अच्छी विचारधारा अच्छे विजन के साथ शुद्ध सामान उगा रहे हैं अपने लिए और उन लोगों के लिए.
हमारा लगातार यही उद्देश्य रहता है कि देश के अच्छे किसानों के साथ लोग जुड़े उनके बारे में जाने, और फैमिली डॉक्टर नहीं बल्कि फैमिली फार्मर बने, यानी किसानों की मेहनत का उनको उचित में मेहनताना मिले, किसान डायरेक्ट मंडी के भरोसे ना रहे उनका शोषण बंद हो, और जो लोग शहर कस्बे में रहते हैं वह सीधे किसानों के साथ जुड़े और उनके द्वारा बनाए गए शुद्ध उत्पाद उनसे प्राप्त करें, ताकि दोनों लोग एक दूसरे के पूरक बने.
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देश में हर शहर कस्बे के आसपास ऐसे बहुत सारे किसान हैं जो बहुत अच्छी सोच के साथ ईमानदारी पूर्वक अपना कार्य कर रहे हैं, जरूरत है तो बस सिर्फ एक दूसरे से जुड़ने की।।
ताकि बीच का यह बाजार ना किसानों का शोषण कर पाए और ना ही किसानों से जुड़ने वाले लोगों का.








