एटा,हमारे जनपद एटा की धरती पर कई सूफी संतों का जन्म हुआ है चाहे अमीर खुसरो पटियाली कासगंज अथवा रामचरितमानस रचयिता तुलसीदास जी शूकर क्षेत्र सोरों या फिर भगवान परशुराम की तपोस्थली परसोंन एटा मैं कई सूफी संतों का अवतार हुआ उन्ही में से एक नाम बाल ब्रह्मचारी संत शिरोमणि स्वामी गंगानन्द महाराज जी बड़े ही सिद्ध पुरुष बाबा हुए
बड़े बुजुर्गों की जानकारी के अनुसार स्वामी गंगानन्द महाराज जी लगभग सन 1955 में आकर जनपद एटा के गांव गोला सर्जनपुर आकर तपस्या करने लगे सड़क के किनारे एक छोटी सी कुटी बना ली और बाद में धीरे-धीरे समस्त ग्राम वासियों के सहयोग से मंदिर अथवा आश्रम के रूप में बाबा जी की कुटी तब्दील हो गई स्वामी जी तत्व ज्ञानी के साथ-साथ एक अच्छे वैध भी थे चाहे सर्प काटने से लेकर तमाम प्रकार के रोग का उपचार निशुल्क करते थे
स्वामी जी का आशीर्वाद जिसे भी मिला समझो सफल हो गया चाहे ग्राम पंचायत चुनाव को लेकर या फिर विधानसभा के चुनाव को लेकर एक बार की बात है विधानसभा चुनाव हो रहे थे स्वामी जी की कुटी पर पूर्व विधायक श्री शिशुपाल सिंह यादव का आगमन हुआ स्वामी जी भजन मुद्रा में बैठे थे सामने एक खड़े सहज सरल और सामान्य से दिखने वाले पुरुष पर नजर पड़ी तभी स्वामी जी ने अपना आशीर्वाद रूपी हाथ पूर्व विधायक जी के सिर पर रख दिया और विधायक जी एक बार नहीं दो दो बार चुनाव चिन्ह समाजवादी पार्टी से सफर करते हुए लखनऊ विधानसभा पहुंचे उस समय के दौर में ग्राम गोला विधानसभा सदर एटा में आता था और ग्राम सर्जनपुर सकीट विधानसभा में लगता था विधानसभा चुनाव प्रचार जोरों पर था सकीट विधानसभा के कार्यकर्ता स्वामी जी की कुटी से गुजर रहे थे तभी वहां कुटी पर लगे नल से जल पीने लगे इस समय स्वामी जी ने उन कार्यकर्ताओं का परिचय पूछा सभी कार्यकर्ताओं ने अपने नेता श्री सूरज सिंह शाक्य को चुनाव जिताने हेतु चुनाव प्रचार की बात बताई तभी स्वामी जी ने तपाक से जवाब दिया मेहनत का फल मीठा होता है सभी कार्यकर्ताओं के सिर पर हाथ रखकर कहा आप की मेहनत जरूर रंग लाएगी बस विधि की विधान के अनुसार स्वामी जी का कथन सत्य हुआ और श्री सूरज सिंह शाक्य ने विधायक बनकर मंत्री तक का सफर समाजवादी पार्टी के तय किया
स्वामी जी के पास ना कोई बैंक बैलेंस ना दिखावा ना ही कोई संसाधन मानव सेवा एवं मानव कल्याण ही उनका संकल्प था स्वामी जी बड़े ही दयालु मानव सेवा में 24 घंटे सदैव तत्पर खड़े रहते थे
27 जुलाई 2011 मैं स्वामी जी ने अपना शरीर त्याग दिया स्वामी जी के बताए हुए रास्ते एवं मार्ग पर चलने से शांति के साथ-साथ पापों से भी मुक्ति के साथ साथ आनंद की अनुभूति होती है
स्वामी जी की 16वीं पुण्यतिथि पर सादर नमन
अरविन्द कुमार यादव









