*कारगिल दिवस – मातृभूमि के सच्चे सपूतों को भारतीय मीडिया फाउंडेशन ( नेशनल) कोर कमेटी की तरफ से विनम्र श्रद्धांजलि नमन*
ब्युरो चीफ
BMF News Netwark Uttrakhand
कृष्ण माधव मिश्रा की कलम से
26 जुलाई 1999। ये तारीख सिर्फ कैलेंडर का एक पन्ना नहीं है, ये हमारे देश के स्वाभिमान, शौर्य और बलिदान की गाथा है।
कारगिल युद्ध में हमारे वीर जवानों ने बर्फीली चोटियों पर, -40°C की ठंड में, दुश्मन की ऊंची पहाड़ियों पर चढ़कर तिरंगा फिर से लहराया था। “ऑपरेशन विजय” के नाम से लड़े गए इस युद्ध में भारत ने न सिर्फ जमीन वापस ली, बल्कि पूरी दुनिया को बता दिया कि भारतीय सेना की हिम्मत और जज्बा क्या होता है।
*”ये दिल मांगे मोर”* की गूंज से लेकर “दुर्गम चोटियों के प्रहरी” तक, हर जवान ने मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। कैप्टन विक्रम बत्रा का “या तो तिरंगा लहराकर आऊंगा, या तिरंगे में लिपटकर आऊंगा” आज भी रोंगटे खड़े कर देता है। मेजर सौरभ कालिया, ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव, कैप्टन मनोज पांडे जैसे सैकड़ों नाम हैं जिन्होंने अपनी जान देकर हमें चैन की नींद दी।
कारगिल में 527 से ज्यादा वीरों ने शहादत पाई। उनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया। आज हम आजादी से सांस ले रहे हैं तो उसकी वजह वो हैं जो सरहद पर खड़े हैं।
*आज के दिन का मतलब:*
कारगिल दिवस हमें याद दिलाता है कि देश पहले है। ये दिन शोक का नहीं, गर्व का दिन है। ये दिन उन माओं को सलाम करने का दिन है जिन्होंने अपने लाल देश के नाम कर दिए।
आइए आज हम सब मिलकर उन अमर शहीदों को नमन करें। उनके परिवारों के प्रति सम्मान व्यक्त करें। और ये संकल्प लें कि उनके बलिदान को हम कभी भूलेंगे नहीं।
*”जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी”*
जय हिंद। भारत माता की जय। वन्देमातरम।









