प्राकृतिक खेती अपनाकर मिट्टी, मानव स्वास्थ्य एवं नदियों को बचाया जा सकता है : मुख्य विकास अधिकारी, रिपोर्ट दयानन्द यादव

*प्राकृतिक खेती अपनाकर मिट्टी, मानव स्वास्थ्य एवं नदियों को बचाया जा सकता है : मुख्य विकास अधिकारी*

*नमामि गंगे के तहत कृषि विज्ञान केंद्र अवागढ़ में आयोजित हुई प्राकृतिक खेती कार्यशाला*

*प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाले पांच प्रगतिशील किसान हुए सम्मानित*

*रसायन मुक्त खेती से सुरक्षित होगा पर्यावरण एवं जल स्रोतों का भविष्य*

 

एटा 10 जून 2026 सू0वि0

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिला गंगा समिति, एटा के तत्वावधान में कृषि विज्ञान केंद्र, अवागढ़ में जिलाधिकारी अरविन्द सिंह द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में प्राकृतिक खेती विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद मिश्र ने की। कार्यशाला में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रगतिशील किसानों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग कर प्राकृतिक खेती की नवीन तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती, जीवामृत एवं घनजीवामृत निर्माण, कृषि यंत्रीकरण के समुचित उपयोग तथा एग्रोफॉरेस्ट्री (कृषि वानिकी) के महत्व के प्रति जागरूक करना था। विशेषज्ञों द्वारा किसानों को प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के लाभों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

मुख्य विकास अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से भूमि की उर्वरता, मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि हमें अपनी मातृभूमि को रासायनिक पदार्थों से बचाना होगा। प्राकृतिक खेती न केवल भूमि की उत्पादकता को सुरक्षित रखती है, बल्कि नदियों एवं अन्य जल स्रोतों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

जिला कृषि अधिकारी डॉ. मनवीर सिंह ने कहा कि कृषि विभाग द्वारा किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने हेतु समय-समय पर प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है। इससे अधिकाधिक किसान प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर गुणवत्तापूर्ण तथा स्वास्थ्यवर्धक फसलों का उत्पादन कर सकेंगे।

नमामि गंगे परियोजना के जिला परियोजना अधिकारी आर्यन गौड़ ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग नदियों एवं जलधाराओं के पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है। नदियों के किनारे होने वाली खेती से रासायनिक तत्व जल स्रोतों तक पहुंच जाते हैं, जिससे गंगा सहित अन्य नदियों को नुकसान होता है। उन्होंने पर्यावरण एवं नदी संरक्षण के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाने पर बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पांच प्रगतिशील किसानों को मुख्य विकास अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद मिश्र द्वारा अंगवस्त्र पहनाकर एवं उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया। उन्होंने सम्मानित किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कृषक अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत हैं तथा प्राकृतिक खेती के व्यापक प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, अवागढ़ के निदेशक डॉ. दिनेश मिश्रा, वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह सहित कृषि विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यशाला के दौरान किसानों ने प्राकृतिक खेती संबंधी विभिन्न तकनीकों की जानकारी प्राप्त की तथा अपने अनुभव भी साझा किए।जिला सूचना कार्यालय एटा 👆

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