संवैधानिक अधिकार से वंचित सामान्य वर्ग करें चुनावी बहिष्कार…

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संवैधानिक अधिकार से वंचित सामान्य वर्ग करें चुनावी बहिष्कार…

सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं को मौजूदा सरकार से किसी भी प्रकार की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए शिवाय हिन्दू मुसलमान बयान बाजी के अपना वोट सम्हाल कर रखें आने वाले समय में काम आएगा यही वह धार है जिससे सारी अवधारणायें बदली जा सकती हैं।

जब हमारे सामान्य वर्ग को सरकार प्राथमिकता नहीं देगी तो हम ऐसे लोगों को चुनकर सदन में क्यों भेजे क्या जरूरत है जो हमारे अधिकारों की बात ना कर पाए ना हमें सुविधाएं मुहैया करा पाए तो एक किस आधार पर वोट मांगने चले आते हैं।

संवैधानिक हक तो हम लोगों से छीना जा रहा है और यह इकोसिस्टम सिर्फ संवैधानिक आधार पर ही चलना है तो जब तक आप संवैधानिक अधिकार के लिए आगे नहीं आएंगे तब तक आपका वोट का गलत दुरुपयोग हर राजनीतिक पार्टी अपने-अपने हिसाब से करती रहेंगी।

हर समाज को सरकार अच्छी शिक्षा रोजगार यह तमाम चीजों के लिए बहुत बड़े प्रारूप में करना प्रारंभ कर दिया है बिल्कुल होना भी चाहिए वह उनका मौलिक अधिकार है हम समर्थन करते हैं लेकिन सिर्फ उन्हें ही क्यों सामान्य वर्ग से आने वाले व्यक्तियों को क्यों वंचित रखा जा रहा है सामान्य वर्ग का भी तो उतना ही अधिकार है देश के संसाधनों पर।

क्या यह समाज पार्टीयों को वोट नहीं करती हैं सामान्य वर्ग तो लगभग हर पार्टियों में सुशोभित है सदस्य हैं पदाधिकारी हैं विधायक हैं मंत्री हैं सांसद हैं क्या क्या सामान्य वर्ग से आने वाले छात्र-छात्राओं असहायो इनका भारत के संविधान में कोई भी अधिकार नहीं है।

अगर वास्तविक रूप से भारत को समृद्ध सशक्त ऊर्जावान शिक्षाविद विश्व गुरु बनाना है समरसता वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा को मुखकरता से प्रस्तुत करना है उसे स्थापित बनाए रखना है तो इन्हें क्यों संवैधानिक दर्जे से अछूता किया जाता है और वोट लेने के लिए इन्हीं सामान्य वर्ग के सहारे पूरा संग्राम किया जाता है।

यह बात सामान्य वर्ग के उन हर परिवारों को केंद्रित एवं गांठ बांधकर रख लेना चाहिए कि आप जो कर रहे हैं क्या उससे आप अपने समाज को या अपने बेटे बेटियों को संवैधानिक अधिकार दिला पाएंगे या जब आपके साथ गलत होगा तभी आप समाज के अधिकारों की बात करेंगे।

इसलिए कभी भी भावनाओं में आकर किसी को भी वोट ना करें अपना संवैधानिक हक जो भविष्य के लिए अति आवश्यक है उसे सुरक्षित कर लें वरना आपकी आने वाली नस्ल पिंडियों को रोड़ों पर कटोरा लेकर बैठती दिखेंगी।

आपके हक को भी छीन कर आपको पूर्ण तरीके से सून्य कर दिया जाएगा फिर आप चाह कर भी कुछ नहीं कर पाएंगे इसलिए आपके पास यही एक मताधिकार है जिससे सारा सिस्टम बदल सकता है और आप सबके लिए महत्वपूर्ण है।

कोई भी राजनीतिक पार्टी आपके बगैर अधूरी है आप जिधर घूम जाएंगे उधर बहुत कुछ हो सकता है एक बार झटका देना आवश्यक है जो हमारा नहीं सुनेगा हम उनकी नहीं सुनेंगे।

अपने राजनीतिक सदस्य पदाधिकारी एवं चुनावी कैंडिडेट से अपने अधिकारों को एक लेटर हेड तैयार करें अपनी मांगे लिखकर उन्हें सौंपें और तत्काल फोटो ले और उसे सोशल पर पब्लिक करें वीडियो बनाएं अगर वह सदन में यह बात उठाते हैं आपके समाज के मौलिक अधिकारों के लिए बात करते हैं तो हम वोट देंगे नहीं तो पूर्णता बहिष्कार किया जाएगा।

ज्यादा नहीं हर ग्राम पंचायत से 10 लोगों की टीम बनाएं और इस पर विचार विमर्श करें और वही लेटर हेड हर विधानसभा के हर ग्राम पंचायत से निकलकर लोग इकट्ठा होकर राजनीतिक कैंडिडेट को सौंपिये और उसकी एक-एक प्रति अपने पास रखी जाए भविष्य के लिए की जो जितता है फिर वह क्या करता है।

अगर आप इस मूहिम को आने वाले चुनाव को देखते हुए धार देंगे तो मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि यह गूंज विधानसभा और लोकसभा राज्यसभा में आंधियों की तरह गूंजेगी खबरों में यह 24 घंटे चलेंगीं।

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कड़ी से कड़ी गर मिलेगी, तभी दुख की घड़ी हटेगी।।

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