एजेंडा: पत्रकार की सुरक्षा, सम्मान, अधिकारBMFNEWS

 

 

*एजेंडा: पत्रकार की सुरक्षा, सम्मान, अधिकार*

Oplus_131072

आपने बिल्कुल सही मुद्दा उठाया। जनता के लिए 24 घंटे खबर खोजने, बनाना, छापना, शेयर करना करने वाले पत्रकार साथी सबसे कम सोते हैं, सबसे ज्यादा खतरा झेलते हैं। परिवार, सुरक्षा और सम्मान तीनों एक साथ जुड़े हैं।

 

1. सरकार के सामने रखने वाले मुख्य टॉपिक

– *सुरक्षा*: फील्ड में कवरेज के दौरान हमला, धमकी, FIR में फंसाना। महिला पत्रकारों के लिए अलग सुरक्षा प्रोटोकॉल

– *सम्मान*: सरकारी कार्यक्रमों में मान्यता, प्रेस कार्ड की वैधता, सरकारी विज्ञापन में भेदभाव न हो

– *आर्थिक अधिकार*: मानदेय/पेंशन, हेल्थ बीमा, दुर्घटना बीमा, पेंशन योजना। फ्रीलांस/स्ट्रिंगर साथियों के लिए भी

– *कानूनी संरक्षण*: पत्रकार सुरक्षा कानून बनाना, झूठे केस में तुरंत जमानत, धारा 196, 505 जैसी धाराओं का दुरुपयोग रोकना

– *काम के घंटे*: 24×7 ड्यूटी के बदले शिफ्ट, साप्ताहिक अवकाश, ओवरटाइम

– *डिजिटल सुरक्षा*: ऑनलाइन ट्रोलिंग, डूक्सिंग, अकाउंट हैक के लिए साइबर सेल में नोडल अधिकारी

 

2. सरकार से कब और कैसे बात करें

 

*कब करें*

– *तुरंत*: जब हमला/धमकी/गिरफ्तारी हो

– *तिमाही*: जिला सूचना अधिकारी और DM के साथ पत्रकार बैठक

– *साल में 2 बार*: मुख्यमंत्री/सूचना मंत्री के साथ राज्य स्तरीय ज्ञापन

 

*कैसे करें*

1. *संगठित होकर*: अकेले आवाज दब जाती है। जिला प्रेस क्लब + यूनियन बनाएं। 10-15 लोगों का प्रतिनिधिमंडल ज्यादा असर करता है

2. *लिखित ज्ञापन*: 1 पेज का मांग पत्र। साथ में उदाहरण, अखबार की कटिंग, FIR कॉपी लगाएं

3. *RTI + जनसुनवाई*: DM/CM हेल्पलाइन 1076, UP सरकार का जनसुनवाई पोर्टल

4. *मीडिया के जरिए*: अपने ही चैनल/अखबार में “पत्रकार सुरक्षा” सीरीज चलाएं। जनता का समर्थन सबसे बड़ी ताकत है

 

3. क्या करें – स्टेप बाय स्टेप

 

*त्काल स्तर पर*

– *प्रेस कार्ड नवीनीकरण* कराएं और साथ रखें

– *आपात नंबर* सेव करें: 112, स्थानीय थाना, जिला सूचना अधिकारी, प्रेस क्लब अध्यक्ष

– *बीमा*: बहुत से राज्यों में पत्रकार दुर्घटना बीमा है। UP में “पत्रकार कल्याण कोष” के लिए आवेदन करें

 

*सरकार से मांग के लिए*

1. *ज्ञापन का ड्राफ्ट*:

“विषय: पत्रकार सुरक्षा अधिनियम और कल्याण योजना लागू करने के संबंध में”

4-5 मांगे रखें: सुरक्षा कानून, बीमा, पेंशन 60 साल बाद, हमले पर 24 घंटे में FIR

2. *किसे दें*:

DM कार्यालय, जिलाधिकारी → मुख्यमंत्री को फॉरवर्ड

राज्य सूचना आयुक्त, प्रेस परिषद, विधानसभा अध्यक्ष

3. *फॉलोअप*: हर 15 दिन में आरटीआई लगाकर पूछें “कार्रवाई क्या हुई”

 

*अपनी सुरक्षा के लिए खुद*

– रात/संवेदनशील जगह की कवरेज में 2 लोग जाएं, लोकेशन शेयर करें

– सोशल मीडिया पर धमकी का स्क्रीनशॉट रखें

– लीगल एड: प्रेस क्लब में एक वकील पैनल बनवाएं

 

4. पहले से मौजूद कुछ हक

भारत में *Working Journalists Act* और *Press Council Act* हैं। UP में पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य बीमा और पेंशन जैसी योजनाएं समय-समय पर आती हैं। इसके लिए जिला सूचना कार्यालय में रजिस्ट्रेशन जरूरी है।

 

*सबसे जरूरी बात*: हम खबर जनता के लिए बनाते हैं। इसलिए जनता को साथ लें। “पत्रकार सुरक्षित तो लोकतंत्र सुरक्षित” ये नैरेटिव बनाएं।

 

आप Lucknow से हैं तो शुरुआत *लखनऊ प्रेस क्लब* और *DM लखनऊ* को संयुक्त ज्ञापन से कर सकते हैं। फिर सभी जिलों से एक ही दिन ज्ञापन दिलवाएं तो सरकार को सुनना पड़ेगा।

 

आप किस मुद्दे को सबसे पहले उठाना चाहते हैं – सुरक्षा कानून या बीमा/पेंशन? मैं उसके लिए 1 हमारी और क्या अन्य मांगे होनी चाहिए

 

 

पिछले 10 सालों में काफी कुछ समस्याएं बदली है समाधान कागजों में है

 

 

जमीन पर स्थित कुछ अलग है

 

हम भी बहुत कुछ सोचते हैं पर कर नहीं पाते समय अभाव या अन्य कोई कारण

 

 

हमको इतना डिस्टर्ब कर दिया है सरकारी योजनाओं ने मीडियाहट के लिए,, उचित समय पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई सटीक व्यवस्था नहीं बनाई गई सांसद विधायक सिर्फ चुनाव में संज्ञान लेते हैं वादा करते हैं

 

चुनाव के बाद व्यस्त हो जाते हैं और हम भी उन्हें याद दिलाने का कोई रूपरेखा तैयार नहीं करते

 

हम अपनी जिम्मेदारी संगठन के मुखिया पर डालते हैं

 

 

संगठन एवं सरकार कई बातों में से अपने हित की पहले व्यवस्था करती है पत्रकार हित में सिर्फ बात होती है काम नहीं इसके लिए जिम्मेदार कौन

अध्ययन का विषय है जूम मीटिंग बहुत जरूरी है हम सबको मालूम है चाचा परी चाचा संवाद प्लेटफार्म खत्म हो गए उसको लेकर चिंता तो रहती है व्यवस्था पटरी पर लाने के लिए एक प्रयास कर सकते हैं तो अपना नाम जोड़े और अपने ग्रुप मेंबर को आगे भेज दें ग्रुप पर जानकारी से अवगत करा दें हमने अपना नाम डाल दिया ग्रुप के अगले मेंबर नाम और जिला डालकर अवगत करा दें अपडेट एवं फॉलो अप बनाए रखना भी हमारी अपनी जिम्मेदारी है दूसरों पर ना डालें दूसरों के भरोसे बहुत ज्यादा रहना ठीक नहीं सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारी तय करें ईमानदारी से पूरी करें समस्या सिर्फ समस्या पर चर्चा करना बेवकूफी है

आज से हम समस्या और समाधान पर अपना पूरा फोकस कर सकते हैं विचार दे सकते हैं सुझाव प्राप्त कर सकते हैं

Leave a Comment