जोगिंद्रा बैंक में कथित भ्रष्टाचार का रैकेट बेनकाब! अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने गुरमीत सिंह पर लगाए गंभीर आरोप”

जी आर भारद्वाज वरिष्ठ पत्रकार।“जोगिंद्रा बैंक में कथित भ्रष्टाचार का रैकेट बेनकाब! अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने गुरमीत सिंह पर लगाए गंभीर आरोप”

सोलन,हिमाचल प्रदेश के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में उस समय भारी हलचल मच गई जब Jogindra Central Cooperative Bank Ltd. के खिलाफ करोड़ों रुपये के कथित एनपीए घोटाले, ऑडिट रिपोर्टों में हेरफेर, वित्तीय अनियमितताओं, फर्जीवाड़े और भ्रष्ट अधिकारियों के संगठित गठजोड़ को लेकर गंभीर आरोप सामने आए। पूरे मामले को लेकर अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा लगातार खुलकर सामने आए हैं और उन्होंने बैंक प्रबंधन व संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।

जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा द्वारा 30 अप्रैल 2026 को NABARD के मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO), मुंबई को एक विस्तृत शिकायत भेजी गई थी, जिसमें जोगिंद्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, सोलन के कई अधिकारियों पर कथित धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ियों तथा चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की ऑडिट रिपोर्टों में हेरफेर करने व शाखा रामशहर के 22 लाख रुपए की सब्सिडी खाने के उद्देश्य से 80 लाख रुपए के ऋण वितरण जैसे अत्यंत गंभीर आरोप लगाए गए थे। बताया जा रहा है कि उक्त शिकायत को NABARD द्वारा 19 मई 2026 को आगे की कार्रवाई हेतु Registrar Cooperative Societies Himachal Pradesh को प्रेषित किया गया।

अपनी नवीनतम प्रतिनिधित्व याचिका में अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने आरोप लगाया है कि जोगिंद्रा बैंक के अधिकारी गुरमीत सिंह, जो वर्तमान में हेड ऑफिस सोलन में तैनात हैं, ने नालागढ़ के पुराना बाजार शाखा प्रबंधक रहते हुए लाखों रुपये के Joint Liability Group (JLG) ऋण कथित रूप से बैंक नियमों और RBI दिशानिर्देशों की खुली अवहेलना करते हुए स्वीकृत एवं वितरित किए। शिकायत के अनुसार इन ऋण खातों में आवश्यक दस्तावेजी सत्यापन, सुरक्षा मानकों और बैंकिंग प्रक्रिया का पालन सही तरीके से नहीं किया गया, जिसके चलते आज लगभग 7 लाख रुपये से अधिक की राशि एनपीए एवं असुरक्षित ऋण के रूप में लंबित बताई जा रही है।

मामले को और गंभीर बनाते हुए अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने आरोप लगाया है कि बैंक प्रबंधन ने कथित घोटालों, गबन, वित्तीय अनियमितताओं और बड़े पैमाने पर हुए एनपीए को दबाने के उद्देश्य से गुरमीत सिंह को हेड ऑफिस सोलन में रिकवरी एवं लॉ सेक्शन का प्रभारी नियुक्त किया। शिकायत में दावा किया गया है कि इस दौरान 100 करोड़ रुपये से अधिक के एनपीए ऋण खातों को दबाने, फाइलों में हेरफेर करने, वसूली प्रक्रिया को प्रभावित करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने का कथित प्रयास किया गया।

शिकायत में AGM राम पॉल, AGM कुलदीप सिंह, AGM हरीश शर्मा, शाखा प्रबंधक जगदीप शर्मा, उम राज ठाकुर, नीना शर्मा, दीपक सूद तथा प्रबंध निदेशक पंकज सूद (HAS) सहित कई अधिकारियों के नाम लेते हुए उन पर कथित मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि इन अधिकारियों ने मिलकर बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग किया, ऑडिट रिपोर्टों को प्रभावित किया तथा बैंक की वास्तविक वित्तीय स्थिति को छिपाने का प्रयास किया ताकि भारी वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा न हो सके।

अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने अपने आरोपों में यह भी कहा है कि जोगिंद्रा बैंक के हेड ऑफिस सोलन में बैठे कुछ अधिकारियों का एक “संगठित भ्रष्ट तंत्र” वर्षों से सक्रिय है, जो अपने राजनैतिक प्रभाव और विभागीय संरक्षण के दम पर कार्यवाही से बचता रहा है। शिकायत के अनुसार गुरमीत सिंह को बाद में स्थापना शाखा (Establishment Section) का प्रभारी भी बना दिया गया ताकि बैंक के प्रशासनिक एवं संचालन तंत्र पर कथित रूप से नियंत्रण बनाए रखा जा सके।

सूत्रों के अनुसार शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई मामलों में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की ऑडिट रिपोर्टों को कथित रूप से “डिस्टॉर्ट” कर वास्तविक एनपीए स्थिति छिपाई गई, जबकि संबंधित विभागों और अधिकारियों ने बार-बार शिकायतें मिलने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। बताया जा रहा है कि अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा पूर्व में भी 30 से अधिक शिकायतें विभिन्न विभागों को भेज चुके हैं, लेकिन अब तक किसी भी आरोपी अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं हुई, जिससे विभागीय व राजनैतिक संरक्षण और मिलीभगत के आरोप और गहरे हो गए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में भारी चिंता और चर्चा का माहौल है। बैंक कर्मचारियों और खाताधारकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो अरबों रुपये के कथित एनपीए घोटाले, ऑडिट हेरफेर और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

उधर, अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने दावा किया है कि उनके पास संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध पर्याप्त दस्तावेजी, तकनीकी एवं वित्तीय साक्ष्य उपलब्ध हैं, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय विजिलेंस जांच, स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट तथा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

अब निगाहें Registrar Cooperative Societies Himachal Pradesh तथा NABARD पर टिकी हैं कि वे इस संवेदनशील मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में कथित रूप से जड़ें जमा चुके भ्रष्टाचार एवं ऑडिट हेरफेर के इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच हो पाएगी या नहीं।

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