*एटा पुलिस की तानाशाही पर बवाल: ‘थानेदार बना जज’, मानवाधिकार आयोग से उच्च स्तरीय जांच की मांग:*
एटा, उत्तर प्रदेश:
जनपद एटा के थाना रिजोर में कानून के रक्षकों द्वारा कानून को बंधक बनाने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। रिजोर थाना अध्यक्ष द्वारा एक फरियादी के साथ किए गए अभद्र व्यवहार और ‘मैं ही संविधान हूँ’ जैसी टिप्पणी ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। भारतीय मीडिया फाउंडेशन (BMF) नेशनल ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
एके बिंदुसार की कड़ी चेतावनी: “थानेदार जज कैसे बन सकता है?”
भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल) कोर कमेटी के संस्थापक एके बिंदुसार ने इस प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह घटना उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि को धूमिल करने वाली है। बिंदुसार ने सवाल उठाया कि “एक थाना प्रभारी भला जज कैसे बन सकता है?” उन्होंने कहा कि किसी भी विचाराधीन मामले वाले व्यक्ति को अपराधी या गुंडा करार देना सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन और न्यायपालिका के अधिकारों का अतिक्रमण है।
मुख्य बिंदु:
न्यायिक प्रक्रिया का अपमान: एके बिंदुसार ने स्पष्ट कहा कि विचाराधीन मुकदमों का हवाला देकर पीड़ित को प्रताड़ित करना और उसे ‘थाना दिवस’ जैसे मंच पर सार्वजनिक रूप से अपमानित करना पुलिस के प्रोटोकॉल और मानवाधिकार नियमों के विरुद्ध है।
लोकतंत्र के लिए खतरा: भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि यदि थानों में फरियादियों के साथ ‘अपराधी’ जैसा बर्ताव किया जाएगा, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करेगी।
उच्च स्तरीय जांच की मांग: भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि पुलिस की वर्दी की आड़ में चल रही इस मनमानी पर रोक लग सके।
पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान
पीड़ित नितिन तिवारी का आरोप है कि थाना अध्यक्ष ने उन्हें फर्जी मुकदमों में जेल भेजने की धमकी दी और बिना किसी कानूनी समन या वारंट के घर पर पुलिस भेजकर दबाव बनाया। थाना अध्यक्ष का यह रवैया न केवल अलोकतांत्रिक है, बल्कि यह संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनकी उपेक्षा को भी दर्शाता है।
क्या कार्रवाई होगी?
एटा जनपद का यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। सवाल यह है कि क्या अपनी मनमानी को ‘संविधान’ बताने वाले थाना अध्यक्ष पर विभाग कार्रवाई करेगा, या फिर फरियादियों को इसी तरह पुलिसिया आतंक का शिकार होना पड़ेगा?
भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल)ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में थाना प्रभारी के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए बड़े स्तर पर आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा।







