*महानायक भगवान परशुराम जयंती: युग चेतना के संवाहक और सनातन धर्म के रक्षक को शत-शत नमन*
*भारतीय मीडिया फाउंडेशन की ओर से समस्त देशवासियों को अक्षय तृतीया एवं भगवान परशुराम जन्मोत्सव की अनंत हार्दिक शुभकामनाएँ*
ए.के. बिंदुसार
(संस्थापक, भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी)
दिनांक: 19 अप्रैल, 2026
सनातन संस्कृति के आकाश में भगवान परशुराम एक ऐसे देदीप्यमान नक्षत्र हैं, जिनकी चमक युगों-युगों से मानवता का मार्ग प्रशस्त कर रही है। आज जब हम उनकी जयंती मना रहे हैं, तो यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उस ‘युग चेतना’ को पुनर्जीवित करने का संकल्प है, जिसने समाज को भयमुक्त और न्यायसंगत बनाने के लिए शस्त्र और शास्त्र दोनों का वरण किया। भगवान परशुराम केवल एक कालखंड के नायक नहीं, बल्कि वे मानव उत्थान के शाश्वत प्रतीक हैं।
1. सामाजिक दृष्टिकोण: समरसता और शोषणमुक्त समाज की स्थापना
भगवान परशुराम का संपूर्ण जीवन सामाजिक न्याय की एक जीवंत गाथा है। तत्कालीन समय में जब समाज में अराजकता व्याप्त थी और शक्तिशाली वर्ग निर्बलों का उत्पीड़न कर रहा था, तब परशुराम जी ने ‘परशु’ उठाकर यह संदेश दिया कि अन्याय को सहना भी उतना ही बड़ा पाप है जितना अन्याय करना।
उनका सामाजिक दृष्टिकोण किसी वर्ग विशेष तक सीमित नहीं था, बल्कि वे एक ऐसी ‘सामाजिक समरसता’ के पक्षधर थे जहाँ ज्ञान (ब्राह्मणत्व) और शक्ति (क्षत्रियत्व) का मेल लोककल्याण के लिए हो। उन्होंने समाज को सिखाया कि जब शास्त्र अपनी प्रभावशीलता खोने लगे, तो धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाना अनिवार्य हो जाता है। आज के पत्रकारिता जगत में भी हमें उनके इसी सिद्धांत को अपनाना होगा—जहाँ हमारी कलम अन्याय के विरुद्ध ‘परशु’ बनकर प्रहार करे।
2. राजनैतिक दृष्टिकोण: सत्ता की निरंकुशता पर अंकुश
राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में भगवान परशुराम को प्रथम ‘क्रांतिकारी विचारक’ माना जा सकता है। उन्होंने उस समय के हैयय वंश के राजा कार्तवीर्य अर्जुन जैसे आततायी शासकों का अंत कर यह सिद्ध किया कि सत्ता का आधार ‘अधिकार’ नहीं, बल्कि ‘सेवा’ होना चाहिए।
उनका राजनैतिक दर्शन स्पष्ट था:
उत्तरदायी शासन: शासक वही है जो प्रजा के दुखों को अपना समझे।
भ्रष्टाचार का अंत: उन्होंने सत्ता के मद में चूर भ्रष्ट तंत्र को जड़ से उखाड़ फेंकने का कार्य किया।
शक्ति का विकेंद्रीकरण: उन्होंने जीती हुई भूमि को कश्यप ऋषि और अन्य विद्वानों को सौंपकर यह संदेश दिया कि नेतृत्व का मोह विनाशकारी होता है।
आज के लोकतंत्र में जब हम पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही की बात करते हैं, तो भगवान परशुराम के राजनैतिक आदर्श हमें एक स्वच्छ और नैतिक राजनीति की प्रेरणा देते हैं।
3. आर्थिक दृष्टिकोण: स्वावलंबन और पारिस्थितिकी संतुलन
अक्सर लोग भगवान परशुराम के योद्धा स्वरूप को ही देखते हैं, परंतु वे एक महान आर्थिक रणनीतिकार भी थे। भारत के पश्चिमी तट (कोंकण और केरल) का उद्धार इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। उन्होंने समुद्र से भूमि प्राप्त कर उसे कृषि योग्य बनाया और वहाँ बस्तियाँ बसाईं।
उनका आर्थिक दृष्टिकोण ‘ग्राम स्वराज’ और ‘स्वावलंबन’ पर आधारित था। उन्होंने प्रकृति के साथ छेड़छाड़ किए बिना संसाधनों के सदुपयोग पर बल दिया। उनके अनुसार, देश की आर्थिक रीढ़ किसान और श्रमिक हैं। उन्होंने कृषि को सम्मानजनक व्यवसाय बनाया और जल प्रबंधन की नई तकनीकें विकसित कीं। आज के ‘आत्मनिर्भर भारत’ का मूल मंत्र भगवान परशुराम के इसी आर्थिक चिंतन में निहित है।
4. सनातन धर्म के महानायक: ज्ञान और वीरता का अद्भुत समन्वय
भगवान परशुराम सप्त ऋषियों के संरक्षण में पले-बढ़े और भगवान शिव के परम शिष्य बने। वे ‘अजर-अमर’ (चिरंजीवी) हैं, जिसका अर्थ है कि उनके विचार कभी नहीं मरते। वे सनातन धर्म के वे महानायक हैं जिन्होंने यह सिखाया कि विनम्रता केवल कायरता नहीं होनी चाहिए और वीरता केवल क्रूरता नहीं होनी चाहिए।
उनका जीवन दर्शन हमें सिखाता है:
शास्त्र की मर्यादा: ज्ञान ही समाज का वास्तविक प्रकाश है।
शस्त्र की आवश्यकता: शांति की स्थापना के लिए शक्ति का होना अनिवार्य है।
त्याग की भावना: संपूर्ण पृथ्वी को जीतकर भी उन्होंने स्वयं के लिए एक तिनका नहीं रखा।
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल का संकल्प: कलम से क्रांति
मैं, ए.के. बिंदुसार, भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के माध्यम से आज के दिन सभी मीडिया कर्मियों और पदाधिकारियों का आह्वान करता हूँ कि हम भगवान परशुराम की ‘युग चेतना’ को अपनी लेखनी में उतारें। जिस प्रकार उन्होंने समाज को अधर्म से मुक्त किया, उसी प्रकार हमें अपनी ‘कलम’ के माध्यम से समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, झूठी खबरों और अन्याय के विरुद्ध युद्ध छेड़ना होगा।
हमारी संस्था भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी भगवान परशुराम के उन मूल्यों—न्याय, पारदर्शिता और निडरता—के प्रति सदैव समर्पित है।
पुनः आप सभी को भगवान परशुराम जयंती की कोटि-कोटि बधाई। भगवान परशुराम की कृपा हम सभी पर बनी रहे और हम एक समृद्ध, सशक्त और शिक्षित राष्ट्र के निर्माण में सहभागी बनें।






