तिकुनिया (लखीमपुर खीरी):
क्षेत्र में पिछले काफी समय से जारी भारी बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है।
खास रिपोर्ट पप्पू सिंह की
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिला अध्यक्ष व प्रमुख किसान नेता जयमल सिंह की अगुवाई में किसानों और स्थानीय उपभोक्ताओं ने आंदोलन को और तेज करते हुए तिकुनिया पावर हाउस का घेराव कर दिया है।
इस आंदोलन को स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पूरी जनता का भारी समर्थन मिल रहा है। प्रदर्शन में मुख्य रूप से पूर्व प्रधान जगदीप सिंह जग्गा भी शामिल हुए। उनकी मौजूदगी और क्षेत्र के सैकड़ों लोगों के जुटने से बिजली विभाग के खिलाफ चल रहा यह धरना प्रदर्शन और अधिक मजबूत हो गया है।
जयमल सिंह और जगदीप सिंह जग्गा की अगुवाई में
पावर हाउस परिसर में भारी संख्या में पहुंचे किसान और ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। इस घेराव और तेज होते आंदोलन के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
‘जब तक समाधान नहीं, तब तक हटेंगे नहीं’: किसान नेता जयमल सिंह और पूर्व प्रधान जगदीप सिंह जग्गा ने दो टूक शब्दों में कहा कि तिकुनिया क्षेत्र की जनता अघोषित कटौती और लो-वोल्टेज के कारण न तो रात में सो पा रही है और न ही दिन में कोई काम कर पा रही है। जब तक बिजली विभाग लिखित में ठोस आश्वासन और समस्या का स्थाई समाधान नहीं देता, पावर हाउस से धरना समाप्त नहीं होगा।
सैकड़ों ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: घेराव में क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण और उपभोक्ता अपने हक की आवाज बुलंद करने पहुंचे हैं। लोगों का कहना है कि रोस्टरिंग के नाम पर कई-कई घंटों की कटौती की जा रही है और शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती।
खेती-किसानी और व्यापार ठप: किसानों ने रोष व्यक्त किया कि लो-वोल्टेज के कारण सिंचाई के साधन बंद पड़े हैं, जिससे फसलें सूखने की कगार पर हैं। वहीं कस्बा के व्यापारियों का धंधा भी पूरी तरह चौपट हो चुका है।
अधिकारियों को कड़ी चेतावनी: घेराव के दौरान वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही जर्जर तार, ओवरलोडेड ट्रांसफार्मर को बदलने और बिजली आपूर्ति में सुधार का काम शुरू नहीं हुआ, तो इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
क्षेत्र के सैकड़ों लोगों की मौजूदगी के कारण पावर हाउस पर भारी भीड़ जमा है। प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पुलिस और प्रशासनिक टीम को अलर्ट किया गया है, ताकि बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों को बुलाकर इस समस्या पर वार्ता कराई जा सके। प्रदर्शनकारी अपने साथ पूरी तैयारी से आए हैं, जिससे साफ है कि बिना ठोस समाधान के वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।









