*फसल अवशेष प्रबंधन एवं पराली के समुचित उपयोग को लेकर तीन प्रचार वाहनों को डीएम ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना*
*तीनों तहसीलों की ग्राम पंचायतों में किसानों को पराली न जलाने एवं फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए किया जाएगा जागरूक*
*पराली को खेत में ही जैविक खाद के रूप में उपयोग कर बढ़ाएं मिट्टी की उर्वरा शक्ति एवं फसल उत्पादन : डीएम*
एटा, 05 अक्टूबर 2026। जिलाधिकारी एम. अरुन्मोली ने आज कलेक्ट्रेट परिसर, एटा से फसल अवशेष प्रबंधन एवं पराली के समुचित उपयोग के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए तीन प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह प्रचार वाहन जनपद की तीनों तहसीलों की ग्राम पंचायतों में पहुंचकर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन, पराली न जलाने तथा इसके उपयोग के विभिन्न लाभों के संबंध में जागरूक करेंगे। इस अवसर पर जिला कृषि अधिकारी डॉ. मनवीर सिंह एवं उप जिलाधिकारी रविंद्र कुमार सिंह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी ने कहा कि फसल अवशेष एवं पराली को खेतों में जलाना पर्यावरण के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति के लिए भी नुकसानदायक है। पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव एवं उपयोगी जीवांश नष्ट होते हैं, जिससे मृदा की उर्वरता प्रभावित होती है और आगामी फसल के उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। किसानों को इन दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए फसल अवशेषों को खेत में न जलाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पराली एवं अन्य फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करते हुए इन्हें खेत में ही जैविक खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता एवं उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में मदद मिलेगी तथा किसानों को खेती में होने वाले अनावश्यक खर्च को कम करने में भी लाभ मिलेगा।
जिलाधिकारी ने बताया कि तीनों प्रचार वाहन निर्धारित रूट के अनुसार तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में जाकर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की वैज्ञानिक विधियों, पराली के सदुपयोग तथा पराली न जलाने के लिए जागरूक करेंगे। किसानों को बताया जाएगा कि फसल अवशेषों को खेत में ही उचित तरीके से प्रबंधित कर जैविक खाद के रूप में उपयोग करने से भूमि की उर्वरा शक्ति में सुधार किया जा सकता है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि पराली एवं फसल अवशेषों को खेत में न जलाएं, बल्कि उनका समुचित प्रबंधन सुनिश्चित करें। फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य में सुधार होगा और कृषि उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। यह अभियान किसानों की आय में वृद्धि एवं उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास है।जिला सूचना कार्यालय एटा 👆















