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उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़
नसीम अहमद हत्याकांड में 12 दिन बाद भी फरार आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर,तीन आरोपी जेल भेजे जा चुके, लेकिन अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से परिजनों और पत्रकारों में बढ़ा आक्रोश; डीआईजी कला निधि नैथानी से जल्द मिलेगा ग्रामीण अंचलीय पत्रकार एसोसिएशन
हापुड़ में पत्रकार नसीम अहमद हत्याकांड को करीब 12 दिन बीत जाने के बावजूद मामले में फरार चल रहे आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। एक पत्रकार की पीट-पीटकर हत्या जैसे गंभीर मामले में आरोपियों का अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहना पीड़ित परिवार के साथ-साथ पत्रकारों के बीच भी गहरी नाराजगी का कारण बना हुआ है। हालांकि पुलिस ने हत्याकांड में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन शेष फरार आरोपियों तक पुलिस के हाथ अब तक नहीं पहुंच सके हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर फरार आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी क्यों हो रही है और उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस की ओर से क्या प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।ग्रामीण अंचलीय पत्रकार एसोसिएशन भारत की हापुड़ इकाई ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अब इस प्रकरण में उच्चाधिकारियों से मुलाकात करने का निर्णय लिया है। संगठन की ओर से जल्द ही डीआईजी से मुलाकात कर पत्रकार नसीम अहमद हत्याकांड में फरार आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की जाएगी।दरअसल, 18 अक्टूबर को हापुड़ देहात क्षेत्र के जरौठी रोड स्थित गिरधारी नगर पीर के पास दशहरे के विज्ञापन के सिलसिले में पहुंचे पत्रकार नसीम अहमद के साथ कुछ लोगों द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप है। गंभीर रूप से घायल होने के बाद नसीम अहमद की मौत हो गई थी। घटना के बाद पत्रकार जगत में आक्रोश फैल गया था। संगठन का कहना है कि एक पत्रकार की इस तरह पीट-पीटकर हत्या किया जाना न केवल बेहद गंभीर आपराधिक घटना है, बल्कि यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर भी गंभीर हमला है।23 अक्टूबर को ग्रामीण अंचलीय पत्रकार एसोसिएशन भारत की हापुड़ इकाई ने संगठन के जिलाध्यक्ष चंदन सिंह के नेतृत्व में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर नसीम अहमद हत्याकांड में आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई थी। पत्रकारों ने जिलाधिकारी के समक्ष मामले की निष्पक्ष जांच, सभी नामजद एवं अज्ञात आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने सहित कई महत्वपूर्ण मांगें रखी थीं।ज्ञापन में पत्रकार संगठन की ओर से आरोप लगाया गया था कि 18 अक्टूबर को नसीम अहमद दशहरे के विज्ञापन के सिलसिले में जरौठी रोड स्थित गिरधारी नगर पीर के पास पहुंचे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की। मारपीट में गंभीर रूप से घायल होने के बाद नसीम अहमद की मौत हो गई। घटना को लेकर पत्रकारों ने गहरा रोष जताते हुए कहा था कि पत्रकार के साथ इस प्रकार की हिंसा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता औरलोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।पत्रकारों ने मांग की थी कि मामले में नामजद और अज्ञात सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही महिला पत्रकारों की तहरीर पर छेड़छाड़, मारपीट और हत्या के प्रयास समेत संबंधित धाराओं में अलग मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग भी ज्ञापन के माध्यम से उठाई गई थी, ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो सके और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।परिवार को पांच करोड़ रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग ग्रामीण अंचलीय पत्रकार एसोसिएशन ने मृतक पत्रकार नसीम अहमद के परिवार को पांच करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग की थी। साथ ही उनकी बेटी की आगामी शादी का खर्च सरकार द्वारा उठाने, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और पीड़ित परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई थी। पत्रकार संगठन का कहना था कि परिवार ने अपना एक सदस्य खोया है और ऐसी स्थिति में सरकार को पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए।इसके अलावा संगठन ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज उपलब्ध कराने, आरोपियों से जुड़े कार्यालय और गोदाम पर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने तथा हापुड़ नगर में पत्रकार नसीम अहमद के नाम पर सड़क का नामकरण किए जाने की मांग भी उठाई थी। ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आयुक्त मेरठ मंडल, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग हापुड़ तथा समस्त पत्रकारों को भी भेजी गई थी।12 दिन बाद भी गिरफ्तारी न होने पर उठ रहे सवाल पत्रकार संगठन का कहना है कि ज्ञापन सौंपे जाने के बाद भी अब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है
हत्याकांड को करीब 12 दिन बीत चुके हैं और कुछ आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। ऐसे में पीड़ित परिवार और पत्रकारों में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर फरार आरोपियों की गिरफ्तारी कब होगी। तीन आरोपियों को जेल भेजे जाने के बावजूद अन्य आरोपियों का पुलिस की पकड़ से दूर रहना जांच की गति और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।वहीं, सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि कुछ लोग कथित रूप से सांठ-गांठ कर पत्रकार नसीम अहमद हत्याकांड के फरार आरोपियों को बचाने तथा मुकदमे को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में पत्रकार संगठन का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी आरोपी को कानून के शिकंजे से बचने का मौका न मिले।ग्रामीण अंचलीय पत्रकार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले को लेकर पीछे हटने वाला नहीं है। संगठन जल्द ही डीआईजी से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी देगा और फरार आरोपियों की तत्काल,गिरफ्तारी समेत अन्य मांगों को मजबूती से उनके समक्ष रखेगा। संगठन का कहना है कि पत्रकार नसीम अहमद के परिवार को न्याय दिलाना और हत्याकांड में शामिल प्रत्येक आरोपी को कानून के तहत सजा दिलाना संगठन की प्राथमिकता है।इस मौके पर पंडित मुरलीधर शर्मा, मोहम्मद हाशिम, हामिद खान, गुलफाम सैफी हापुड़,फ गुलफाम सैफी अटूटा, लोकेश शर्मा, चेतन कुमार, जितेंद्र कुमार, शराफत सैफी, नदीम नकवी, आबिद हुसैन, डॉ. पीतम सिंह, आरिफ अली, आरिफ मसूदी, शमशाद अली, सलमान खान, अरुण बेनीवाल, जितेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।।
पंडित मुरलीधर शर्मा पत्रकार
















