*जलेसर विधायक का चुनावी लॉलीपॉप: 1200 मीटर सड़क का शिलान्यास, जबकि रोडवेज आज तक नहीं चला पाए*
*एटा।* जलेसर विधायक संजीव दिवाकर द्वारा जलेसर-अवागढ़ मार्ग से नगला लक्ष्मण तक 1200 मीटर लंबी सड़क के निर्माण का शिलान्यास किए जाने को क्षेत्र की जनता “चुनावी लॉलीपॉप” मान रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम का सहारा लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटाकर छोटी सड़कों का फीता काटना तो आसान है, लेकिन जलेसर की सबसे बड़ी और लंबे समय से लंबित मांगों पर विधायक पूरी तरह फेल साबित हुए हैं।
जलेसर में रोडवेज डिपो का निर्माण 2022 में शुरू हुआ था। साढ़े चार साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी डिपो आज तक चालू नहीं हो पाया। बार-बार अगस्त-सितंबर 2026 तक उद्घाटन की तारीखें बताई गईं, चालक भर्ती की खबरें आईं, एनओसी मिलने की बातें हुईं, लेकिन अक्टूबर 2026 में भी जलेसर से एक भी रोडवेज बस नियमित रूप से नहीं चल पाई। डिपो का संचालन शुरू न हो पाना जलेसरवासियों के साथ सीधा धोखा है। दिल्ली, आगरा, अलीगढ़, हाथरस जैसे रूटों की सीधी सेवा का वादा आज भी कागजों तक सीमित है।
इसी तरह राष्ट्रीय राजमार्ग 321G (आगरा-जलेसर-एटा) आज भी गड्ढों, धूल और खराब हालत से जूझ रहा है। बड़े पैमाने पर सुधार और चौड़ीकरण की योजनाएं घोषित हुई हैं, जमीन अधिग्रहण और टेंडरों की खबरें आई हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में यह राजमार्ग अभी भी यात्रियों की जान का दुश्मन बना हुआ है। विधायक के कार्यकाल में इस महत्वपूर्ण हाईवे को गड्ढा-मुक्त बनाने में कोई ठोस सफलता नहीं मिली।
ऐसे में 72 लाख रुपये की लागत वाली मात्र 1200 मीटर की स्थानीय सड़क का शिलान्यास करना विकास का दिखावा है। विधायक और भाजपा नेता छोटी-छोटी सड़कों के शिलान्यास का सिलसिला लगातार चला रहे हैं, लेकिन जलेसर की मूल समस्याएं — रोडवेज डिपो का संचालन, नियमित बस सेवा और एनएच-321G की दुर्दशा — जस की तस बनी हुई हैं।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ऐसे छोटे-मोटे आयोजनों से जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। जलेसर की जनता अब फीता काटने वाले कार्यक्रमों से ऊब चुकी है। उसे चाहिए था कि चार साल से अटका रोडवेज डिपो चालू हो और 321G राजमार्ग की हालत सुधरे। इन मूल मुद्दों पर चुप्पी साधकर छोटी सड़कों के शिलान्यास को “विकसित जलेसर” बताना सरासर चुनावी लॉलीपॉप है।
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