*बिग ब्रेकिंग | जलेसर में रात के अंधेरे में मिट्टी खनन के आरोप*
_*प्रशासन से सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग*_

एटा/जलेसर। तहसील एवं कस्बा जलेसर क्षेत्र में रात्रि के अंधेरे में बड़े डंपरों से बड़े पैमाने पर मिट्टी खनन किए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि कथित खनन एवं मिट्टी परिवहन का सिलसिला रात करीब 10 बजे से सुबह 3 बजे तक चलता है। आरोप है कि मिट्टी से लदे डंपर बुधौली कला चौराहा से महावीर गंज होते हुए मोहल्ला हथौड़ा की ओर लगातार आते-जाते दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार यदि यह खनन बिना वैध अनुमति के हो रहा है तो मामला केवल नियमों की अनदेखी तक सीमित नहीं, बल्कि राजस्व क्षति, कृषि भूमि के संभावित अनधिकृत दोहन और अवैध खनन-परिवहन से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
*सबसे बड़ा सवाल* —खनन वैध है या अवैध? यदि संबंधित स्थानों पर मिट्टी खनन की वैध अनुमति जारी की गई है तो तहसील प्रशासन एवं खनन विभाग को जनहित में यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन-किन गाटा/खसरा नंबरों पर अनुमति दी गई है, स्वीकृत मात्रा कितनी है, अनुमति की अवधि क्या है और उसके लिए निर्धारित शर्तें क्या हैं।
साथ ही यह भी स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता है कि रात्रि 10 बजे से सुबह 3 बजे तक भारी वाहनों से मिट्टी परिवहन की अनुमति नियमों के अनुरूप है अथवा नहीं।
यदि खनन की कोई वैध अनुमति नहीं है तो संबंधित विभागों की जिम्मेदारी बनती है कि मौके पर तत्काल जांच कराकर अवैध खनन एवं परिवहन में प्रयुक्त वाहनों तथा जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करें। वहीं यदि अनुमति है, तो उसकी वास्तविक सीमा और शर्तों के अनुरूप ही खनन हो रहा है या नहीं, इसकी भी जांच जरूरी है।
स्थानीय लोगों ने तहसील प्रशासन, खनन विभाग और पुलिस प्रशासन से रात्रिकालीन खनन एवं डंपरों की आवाजाही की तत्काल जांच, मौके का स्थलीय सत्यापन तथा अनुमति संबंधी अभिलेख सार्वजनिक किए जाने की मांग की है।
अब निगाह प्रशासन के जवाब पर है—जलेसर क्षेत्र में रात के अंधेरे में चल रहा कथित मिट्टी खनन वैध अनुमति के दायरे में है या नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है? आरोपों की निष्पक्ष जांच और तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करना प्रशासन के लिए जरूरी हो गया है।
















