बिहारीगढ़ में धूमधाम से मनाई गई अशोक विजयादशमी: संविधान, बुद्ध दर्शन और वैश्विक शांति का दिया गया संदेश।

बिहारीगढ़ (सहारनपुर):
देहरादून मार्ग स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क में डॉ. अंबेडकर जनकल्याण समिति के तत्वावधान में ‘अशोक विजयादशमी’ का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह, सहारनपुर मंडल के अपर आयुक्त रमेश यादव, इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्र मंडल, प्रेमचंद मोंगा, वरिष्ठ पत्रकार सतीश कुमार आजाद, नरेंद्र सिंह यादव, नीलकमल, संतोष यादव, आरपी सिंह औरैया और संजय सिंह ने संयुक्त रूप से भगवान तथागत बुद्ध के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।
सम्राट अशोक का धम्म और अहिंसा का मार्ग
समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह ने कहा कि कलिंग युद्ध के उपरांत सम्राट अशोक ने शस्त्र त्याग कर शांति और अहिंसा का मार्ग अपनाया था। उन्होंने जनमानस से सम्राट अशोक के आदर्शों पर चलकर समाज में समानता, बंधुत्व और सामाजिक एकता को मजबूत करने का आह्वान किया। वहीं अपर आयुक्त रमेश यादव और अधिवक्ता महेंद्र मंडल ने सम्राट अशोक के जीवन वृत्त और धम्म प्रचार में उनके ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डाला।
वैश्विक संकट और बुद्ध दर्शन
मंच से वर्तमान भू-राजनीतिक उथल-पुथल पर गंभीर मंथन किया गया। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि आज का विश्व रूस-यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और विभिन्न क्षेत्रीय अस्थिरताओं के कारण अशांति के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में ‘लाइट ऑफ एशिया’ भगवान बुद्ध के पंचशील सिद्धांत और अष्टांगिक मार्ग ही मानवता को सही दिशा दे सकते हैं। संप्रभुता का सम्मान, अनाक्रमण और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थायी शांति ला सकते हैं।
संविधान की प्रस्तावना और बंधुता पर बल
कार्यक्रम में भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के मूल भाव—न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता—को दोहराते हुए कहा गया कि राष्ट्र और विश्व की वास्तविक शक्ति युद्ध में नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और मानव गरिमा की रक्षा में निहित है।
गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर सेवाराम साथी, मौ. शाबान, पूर्व सूचना अधिकारी नरेंद्र यादव, सतीश कुमार आजाद, नीलकमल, आरपी सिंह सहित क्षेत्र के अनेक प्रबुद्ध नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वक्ताओं ने अंत में आह्वान किया कि तथागत बुद्ध की शिक्षाओं, सम्राट अशोक के धम्म और बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर के संवैधानिक मूल्यों को अपनाकर ही एक सशक्त व समतामूलक समाज का निर्माण संभव है।














