चंबल की धार पर सीमा का ‘दंगल’: एमपी ने खोदा गड्ढा, यूपी पीडब्ल्यूडी ने ओढ़ी चुप्पी
उसेत घाट पर स्लोप वे निर्माण से पीपा पुल का रास्ता बंद;
15 अक्टूबर की समयसीमा हवा में, जनता परेशान
शंकर देव तिवारी
आगरा/पिनाहट: लापरवाही की भी एक सीमा होती है, लेकिन जब सीमा टूटती है तो सीनाजोरी शुरू हो जाती है। कुछ ऐसा ही नजारा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित चंबल नदी के उसेत घाट पर देखने को मिल रहा है। जहां उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग (UP PWD) की रहस्यमयी चुप्पी और मध्य प्रदेश सेतु निगम की मनमानी के कारण हजारों ग्रामीणों की लाइफलाइन कहा जाने वाला पीपा पुल (प्लेटून पुल) अधर में लटक गया है।
नियम के मुताबिक आगामी 15 अक्टूबर तक इस घाट पर पीपा पुल शुरू हो जाना था, ताकि दोनों राज्यों के बीच आवागमन सुचारू हो सके। लेकिन मध्य प्रदेश सेतु निगम द्वारा बनाए जा रहे पक्के पुल के ‘स्लोप वे’ (ढालू मार्ग) के निर्माण ने पीपा पुल के रास्ते को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है। आश्चर्य की बात यह है कि आगरा पीडब्ल्यूडी इस पूरे घटनाक्रम पर आंखें मूंदे बैठा है, जैसे उसे जनता की सुविधा से कोई सरोकार ही न हो।
नक्शा हमारा, राजशाही ठेके हमारे; फिर मौन क्यों?
उसेत घाट का जो हिस्सा राजस्व रिकॉर्ड (नक्शे) में उत्तर प्रदेश का है, वहां मध्य प्रदेश सरकार ने पक्के पुल का निर्माण करा दिया। स्थानीय स्तर पर जन-आक्रोश भड़का तो आनन-फानन में उत्तर प्रदेश की सीमा में स्लोप वे बनाकर इसे जोड़ने की कोशिश की जा रही है। लेकिन इस निर्माण के चक्कर में जो गड्ढे खोदे गए हैं, उसने पीपा पुल के पारंपरिक मार्ग को ठप कर दिया है।
जब इस संबंध में आगरा पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से सवाल किया जाता है, तो उनका एक ही रटा-रटाया जवाब मिलता है— “हम उसेत घाट पर पक्का पुल नहीं बना रहे हैं, जो कुछ कर रहा है वह मध्य प्रदेश है।”
अधिकारी यह भूल रहे हैं कि:
राजस्व नक्शे में यह जमीन उत्तर प्रदेश की है।
चंबल नदी में स्टीमर चलाने और कच्चे (पीपा) पुल के सारे राजस्व ठेके यूपी के पास रहते हैं।
जब हक उत्तर प्रदेश का है, तो दूसरे राज्य द्वारा मार्ग रोके जाने पर स्थानीय विभाग मूकदर्शक क्यों बना है?
बाईपास और उपमार्ग का कोई अता-पता नहीं
उत्तर प्रदेश की सीमा में स्लोप वे तो उतार दिया जाएगा, लेकिन उसके आगे का मार्ग, उपमार्ग या बाईपास कहां से निकलेगा, कैसे बनेगा और कब तक प्रस्तावित है, इसका जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है। मध्य प्रदेश की निर्माण एजेंसी ने गड्ढा खोदकर रास्ता रोक दिया है, और यूपी का पीडब्ल्यूडी अपने दफ्तरों में चैन की नींद सो रहा है।
‘लोक निर्माण’ या ‘लोक विनाश’?
“एक विभाग नाम लोक निर्माणी, मगर लग रहा पर लोक वासी। अपने घर में चुप है बैठा, दूजे राज्य का काम है होता…”
स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग का नाम भले ही ‘लोक निर्माण’ हो, लेकिन उसका रवैया जनता को परेशानी में डालने वाला है। अपना राज्य अपनी जमीन पर नजर रखने में नाकाम साबित हो रहा है। अगर समय रहते आगरा पीडब्ल्यूडी ने हस्तक्षेप नहीं किया और पीपा पुल के वैकल्पिक मार्ग को क्लियर नहीं कराया, तो 15 अक्टूबर से शुरू होने वाली राह पूरी तरह बंद हो जाएगी।















