जिनके हाथों से तिरंगा, न संभाला जाए.. – *हाशिम फ़िरोज़बादी, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

जिनके हाथों से तिरंगा, न संभाला जाए..
– *हाशिम फ़िरोज़बादी*

अतीत अखिल भारतीय कवि सम्मेलन
जैतपुर कलां। डॉक्टर वी पी मिश्र अतीत स्मृति अखिल भारतीय कवि सम्मेलन जैतपुर कलां में 5 अप्रैल को दोपहर 12 बजे से आरम्भ हुआ जो देर शाम 6 बजे तक चलता रहा और श्रोताओं की तालियों की गड़गड़ाहट से राधिका पैलेस गूंजता रहा।
हास्य, प्रेम, ओज और व्यंग्य की कविताओं से श्रोता मंत्र मुग्ध होते रहे, एक से बढ़कर एक कविताओं के रसपान में डूबे रहे।
विनोद सांँवरिया के संयोजन में सजी इस काव्यांजलि की अध्यक्षता डॉ राजकुमार रंजन जी ने की, कार्यक्रम का संचालन हास्य रस के सुप्रसिद्ध कवि विनोद राजयोगी ने किया।
सर्व प्रथम कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि गण सर्व श्री वीरेश राज शर्मा (DIG, जेल अधीक्षक), सुधीर दुबे जी (समाजसेवी), सीताराम शर्मा जी(जेलर, गाजियाबाद) ने मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के बाद डॉ वीपी मिश्र को पुष्पांजलि अर्पित की।
सभी अतिथियों का सम्मान डॉ निखिलेश मिश्रा, देवेन्द्र शर्मा, राजेश मिश्रा, दिलीप शर्मा ने किया।
कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय कवि हाशिम फ़िरोज़बादी, विनोद राजयोगी (घिरोर), डॉ राजकुमार रंजन, नंदू भदौरिया (इटावा),लाल सिंह प्रहरी (कानपुर) रजिया बेगम जिया(धौलपुर) शमीम कौसर के अतिरिक्त क्षेत्रीय प्रतिभाएं विनोद सांँवरिया, गणेश शंकर विद्यार्थी, राजन भदौरिया ने भी काव्य पाठ किया।

काव्यांश

जिनके हाथों से तिरंगा, न संभाला जाए।
ऐसे नेताओं को संसद से निकाला जाए।
आज तुमको भी एक बात बतानी है मुझे,
आस्तीनों में कोई सांप न पाला जाए।
– हाशिम फ़िरोज़बादी

– रोजी-रोटी हो मकान,सम्मान साथ में राष्ट्र चेतना का भी विवेक होना चाहिए।
जाति-धर्म, भेदभाव,हर विवाद भूलकर देश के नाम पर एक होना चाहिए।।
विनोद ‘राजयोगी ‘

प्यार अंगार है किसी के लिये ।
प्यार मनुहार है किसी के लिये ।
प्यार के रूप यार मत पूछो,
प्यार व्यापार है किसी के लिये ।
– डॉ राज कुमार रंजन (आगरा)

चार अधर इक बाँसुरी, नाचे सिगु बृजधाम।
श्याम है गयो ऊजरो, राधा है गई श्याम।।
– नंदू भदौरिया (इटावा)

प्रेम पावन समर्पण का एक नाम है।
भावनाओं का बहता मृदुल जाम है।
प्रेम राधा भी है, प्रेम मीरा भी है,
प्रेम कान्हा की बंशी का बृजधाम है।
– विनोद सांँवरिया

सच्चे संत वही हैं जो सरहद पर जजुझा करते हैं।
लहू चढ़ा कर सैनिक मां का मस्तक ऊंचा करते हैं।
– लाल सिंह प्रहरी कानपुर

तुम हो मेरी आस सांस विश्वास प्यास जीवन की।
अभिलाषा पूरी की अब कैसी ये दूरी मन की।
– रज़िया बेगम ज़िया।

कार्यक्रम में निम्न गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
पप्पू पुरोहित (प्रधान), संजू तिवारी, राज बहादुर शर्मा, डॉ मदन गोपाल भदौरिया, मुकेश बरुआ, उदयभान भदौरिया, रामसेवक शर्मा (पूर्व प्रधानाचार्य) राजेश मिश्रा, दिलीप शर्मा, देवेंद्र शर्मा, देवेंद्र मिश्रा, दिवाकर दौनेरिया (प्रधानाचार्य) अरविन्द शुक्ला(पूर्व प्रधानाचार्य) गुड्डू विधौलिया, लालू तोमर, घनश्याम भारती, सोनू शर्मा, मुकेश राजपूत, नरेन्द्र भारतीय, अजय कुशवाह, ललित महेरे, कुलदीप भदौरिया, प्रिंस जैन, प्रशान्त कुमार एड, वसीम पठान, एड हरिओम पांडेय (पूर्व अध्यक्ष, बार एसोसिएशन, विजय दौनेरिया योगाचार्य सुरेश चन्द्र बाह) आदि।

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