वाराणसी स्वास्थ्य घोटाला: ‘मौत के सौदागरों’ पर बरसे एके बिंदुसार, उच्च स्तरीय जांच और अस्पतालों की फॉरेंसिक ऑडिट की मांग

*वाराणसी स्वास्थ्य घोटाला: ‘मौत के सौदागरों’ पर बरसे एके बिंदुसार, उच्च स्तरीय जांच और अस्पतालों की फॉरेंसिक ऑडिट की मांग*

 

वाराणसी:

वाराणसी में फल-फूल रहे अवैध नर्सिंग होम और जच्चा-बच्चा की मौतों के सिलसिले पर भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक एके बिंदुसार ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग को इस पूरे मामले में एक उच्च स्तरीय जांच (High-Level Probe) कराने की मांग की हैं।

एके बिंदुसार का कड़ा प्रहार: “यह भ्रष्टाचार नहीं, कत्ल है”

एके बिंदुसार ने स्पष्ट रूप से कहा कि शहर और ग्रामीण इलाकों में हर एक किलोमीटर पर खुले अस्पताल स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि मौत का व्यापार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि:

जांच का विषय: यह केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता नहीं है, बल्कि एक संगठित अपराध है। हर एक अस्पताल और नर्सिंग होम की गहन जांच होनी चाहिए कि वे किन मानकों पर चल रहे हैं।

फॉरेंसिक ऑडिट: उन्होंने मांग की है कि सभी निजी अस्पतालों के रिकॉर्ड, डॉक्टरों की डिग्री और उनके द्वारा किए गए प्रसव के मामलों की फॉरेंसिक ऑडिट कराई जाए।

आशा और एएनएम की मिलीभगत पर उठे सवाल

बिंदुसार ने अपने बयान में सरकारी तंत्र की संलिप्तता को सबसे गंभीर बताया है। उन्होंने जोर दिया कि:

बिचौलिया तंत्र: सरकारी अस्पतालों में तैनात एएनएम और आशाओं का निजी अस्पतालों के साथ जो ‘कमीशन वाला गठजोड़’ है, वह अत्यंत शर्मनाक है। गरीब जनता को सरकारी सुविधाओं से वंचित कर निजी अस्पतालों के हवाले करना एक बड़ा अपराध है।

जवाबदेही: जो आशा और एएनएम सरकारी वेतन ले रही हैं, वे निजी संस्थाओं के एजेंट बनकर काम कैसे कर सकती हैं? इस पर विभाग को तत्काल प्रभाव से जवाबदेही तय करनी चाहिए।

बिंदुसार द्वारा प्रस्तावित समाधान:

उच्च स्तरीय एसआईटी (SIT) गठन: इस पूरे नेक्सस की जांच के लिए एक ऐसी टीम बनाई जाए जो जिला स्तर के अधिकारियों के प्रभाव से मुक्त हो।

सूची का भौतिक सत्यापन: वाराणसी के सभी पंजीकृत और अपंजीकृत अस्पतालों की सूची सार्वजनिक की जाए और हर एक अस्पताल का फिजिकल वेरिफिकेशन हो।

व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन: जो लोग इस कमीशनखोरी के खिलाफ जानकारी देना चाहते हैं, उन्हें सुरक्षा दी जाए ताकि इस ‘मौत के खेल’ के पर्दे के पीछे बैठे असली सरगनाओं को बेनकाब किया जा सके।

क्या सुधर पाएगी व्यवस्था?

एके बिंदुसार के इस बयान ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर ठोस और पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई, तो भारतीय मीडिया फाउंडेशन इसे एक बड़ा जन-आंदोलन बनाएगा। उन्होंने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी प्रलोभन में आकर दलालों के बहकावे में न आएं और प्रसव के लिए सदैव प्रमाणित सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को ही प्राथमिकता दें।

यह मांग वाराणसी में व्याप्त स्वास्थ्य माफियाओं के लिए एक बड़ी चुनौती है। क्या प्रशासन इस उच्च स्तरीय जांच की हिम्मत जुटा पाएगा? समय ही बताएगा।

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