वर्दी वाले दो पुलिसकर्मी, बिना हेलमेट, ट्रिपल लोडिंग में अपनी प्राइवेट बाइक पर सवार होकर निकले। ट्रैफिक नियम? ताक पर।

पत्रकार कृष्ण माधव मिश्रा की खास रिपोर्ट।

 

 

लखनऊ की सड़कों से एक तस्वीर सामने आई है… और ये तस्वीर सिस्टम के चेहरे पर तमाचा है।

 

मामला राजधानी लखनऊ का। वर्दी वाले दो पुलिसकर्मी, बिना हेलमेट, ट्रिपल लोडिंग में अपनी प्राइवेट बाइक पर सवार होकर निकले। ट्रैफिक नियम? ताक पर।

 

फिर नजर पड़ी ₹5 लाख की एक बाइक पर। तुरंत रोका। रौब के साथ आदेश चला – “डॉक्यूमेंट्स दिखाओ।”

 

बाइक सवार ने पलटकर सिर्फ एक सवाल किया… “सर, आप खुद बिना हेलमेट क्यों हैं?”

 

और बस। यहीं आग भड़क गई।

 

आरोप है कि युवक ने कहा, “सारे डॉक्यूमेंट्स डीजी लॉकर में हैं, सर चेक कर लीजिए।” लेकिन सुनवाई नहीं हुई। जवाब मिला, “थाने चलो… गाड़ी वहीं मिलेगी।”

 

सोचिए जरा… जो खुद बिना हेलमेट, तीन लोग एक बाइक पर, कानून को मजाक बना रहे हैं… वही कानून की किताब खोलकर आम जनता को डराने लगे?

 

ये चालान नहीं है साहब, ये दोहरा मापदंड है।

 

अगर वीडियो के आरोप सही हैं, तो सवाल सीधा है और बहुत बड़ा है।

 

कानून का डंडा सिर्फ कमजोर के लिए है क्या? वर्दी वालों के लिए नियम अलग और जनता के लिए अलग?

 

लखनऊ पूछ रहा है… और देश सुन रहा है। कानून सबके लिए बराबर है, या सिर्फ एकतरफा?

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