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जलेसर में भ्रष्टाचार का अंधेरगर्दी राज! बिना बिजली-कनेक्शन के दौड़ रहे सिस्टम, अवैध जनसेवा केंद्रों पर प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में

*जलेसर में भ्रष्टाचार का अंधेरगर्दी राज! बिना बिजली-कनेक्शन के दौड़ रहे सिस्टम, अवैध जनसेवा केंद्रों पर प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में*

_स्टाम्प विक्रेताओं की दुकानों पर नियमों की खुलेआम धज्जियां — फर्जीवाड़े और राजस्व हानि का बड़ा खेल उजागर_

*तुर्रम सिंह राजपूत✍️*

*जलेसर (एटा)।* जनपद एटा की जलेसर तहसील इन दिनों एक बड़े प्रशासनिक घोटाले और भ्रष्टाचार के केंद्र के रूप में चर्चा में है। यहां स्टाम्प विक्रेताओं की दुकानों पर बिना वैध बिजली कनेक्शन और इंटरनेट सुविधा के कंप्यूटर व प्रिंटर धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। इतना ही नहीं, कई स्थानों पर बिना किसी सरकारी अनुमति के अवैध जनसेवा केंद्र (CSC) भी चलाए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे खेल की जानकारी होने के बावजूद जिम्मेदार विभाग पूरी तरह मौन साधे हुए हैं।
नियमों को ठेंगा, अवैध काम धड़ल्ले से जारी
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, जलेसर तहसील परिसर और आसपास की कई स्टाम्प दुकानों में ऐसे कंप्यूटर सिस्टम लगे हैं, जिनका कोई आधिकारिक बिजली कनेक्शन नहीं है। इंटरनेट कनेक्टिविटी भी संदिग्ध है, फिर भी इन मशीनों के जरिए स्टाम्प पेपर बिक्री, दस्तावेजों की प्रिंटिंग और सरकारी सेवाओं का काम लगातार किया जा रहा है।
जनसेवा केंद्र, जो कि ई-गवर्नेंस व्यवस्था के तहत पंजीकृत और नियंत्रित होते हैं, यहां बिना अनुमति के संचालित हो रहे हैं। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि नियमों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।
बिजली और इंटरनेट का रहस्य — चोरी या मिलीभगत?
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब इन दुकानों के पास वैध बिजली कनेक्शन नहीं है, तो कंप्यूटर और प्रिंटर आखिर चल कैसे रहे हैं? क्या बिजली चोरी की जा रही है या फिर अवैध जनरेटर का उपयोग हो रहा है?
इसी तरह, बिना किसी वैध इंटरनेट सेवा प्रदाता के दस्तावेजों की ऑनलाइन प्रोसेसिंग कैसे हो रही है? यह संदेह और गहराता है कि कहीं यह पूरा नेटवर्क फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आम जनता से अवैध वसूली का माध्यम तो नहीं बन गया है।
सरकारी राजस्व को चूना, जनता से खुली लूट
इस अव्यवस्था का सीधा नुकसान सरकारी खजाने को हो रहा है। बिना पंजीकरण और नियमों के संचालन से राजस्व की हानि हो रही है, वहीं आम नागरिकों से मनमाने शुल्क वसूले जा रहे हैं। लोगों को सरकारी सेवाओं के नाम पर ठगा जा रहा है और पारदर्शिता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
अधिकारी मौन — संदेह गहराया
तहसील प्रशासन, जिला प्रशासन, विद्युत विभाग और पुलिस की भूमिका इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में है। इतने बड़े स्तर पर हो रहे इस खेल से अधिकारी अनजान नहीं हो सकते, फिर भी कार्रवाई न होना कई तरह के संदेह पैदा करता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा मामला प्रशासनिक मिलीभगत और संरक्षण के बिना संभव नहीं है।
जनता में आक्रोश, कार्रवाई की मांग तेज
जलेसर के नागरिकों में इस मामले को लेकर भारी रोष है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह भ्रष्टाचार और ज्यादा फैल सकता है।
प्रमुख मांगें
जलेसर तहसील की सभी स्टाम्प दुकानों का औचक निरीक्षण किया जाए
बिना वैध कनेक्शन के चल रहे कंप्यूटर-प्रिंटर तुरंत जब्त किए जाएं
सभी अवैध जनसेवा केंद्रों को बंद कर सख्त कार्रवाई की जाए
दोषी अधिकारियों और लाइसेंसधारियों पर एफआईआर दर्ज की जाए।
जलेसर में सामने आया यह मामला सिर्फ एक तहसील का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर बड़ा सवाल है। यदि प्रशासन अब भी चुप रहा, तो यह साफ संकेत होगा कि भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया जा रहा है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मामले में कब तक मौन रहते हैं या फिर कोई ठोस कार्रवाई होती है।

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