विश्व कल्याण की मंगलकामना के साथ संपन्न हुआ सात दिवसीय विश्व शांति महायज्ञ एवं श्रीराम कथा महोत्सव

रिपोर्ट: सत्यदेव पांडे ( ब्यूरो चीफ- सोनभद्र)

  • हवन, कथा और विशाल भंडारे में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, मेड़र माता मंदिर परिसर सात दिनों तक बना भक्ति और आध्यात्म का केंद्र

चोपन (सोनभद्र)। चोपन गांव स्थित प्राचीन एवं आस्था के केंद्र मेड़र माता मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय विश्व शांति महायज्ञ एवं श्रीराम कथा महोत्सव का सोमवार को पूर्णाहुति हवन, संतों के आशीर्वचन और विशाल भंडारे के साथ भव्य समापन हो गया। विश्व शांति, मानव कल्याण, सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित इस महायज्ञ में पूरे सप्ताह क्षेत्र ही नहीं बल्कि दूर-दराज के जनपदों से हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म और आध्यात्म की गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। सात दिनों तक मेड़र माता मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। कथा पंडाल में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती रही, जहां भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, मर्यादा, त्याग, धर्मनिष्ठा और लोककल्याणकारी चरित्र का विस्तार से वर्णन किया गया। कथा के दौरान राम जन्म, सीता स्वयंवर, राम-सीता विवाह, वनगमन तथा धर्म स्थापना जैसे प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा श्रवण के दौरान अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और पूरा वातावरण श्रीराम के जयघोषों से गूंज उठा। महायज्ञ के अंतिम दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं का मंदिर परिसर में पहुंचना शुरू हो गया। यज्ञशाला में वैदिक ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच पूर्णाहुति अनुष्ठान संपन्न कराया गया। श्रद्धालुओं ने यज्ञ कुंड में आहुति अर्पित कर विश्व शांति, राष्ट्र की उन्नति, क्षेत्र की खुशहाली, किसानों की समृद्धि और जन-जन के कल्याण की कामना की। यज्ञ की पूर्णाहुति के समय पूरा परिसर भक्तिरस में डूब गया और जय श्रीराम, हर-हर महादेव तथा सनातन धर्म के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा। आयोजन के मुख्य संरक्षक एवं धर्माचार्य शिवकुमार पहाड़ी बाबा ने कहा कि वर्तमान समय में मानवता अनेक प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में यज्ञ, कथा और सत्संग जैसे आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पूज्य गुरु हनुमान दास महाराज सदैव लोककल्याण और विश्व शांति के लिए यज्ञ करने की प्रेरणा देते थे। उन्हीं की प्रेरणा से यह महायज्ञ आयोजित किया गया, ताकि समाज में प्रेम, सद्भाव, नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना का विस्तार हो सके। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा, करुणा, मानवता और लोककल्याण का संदेश देती है। यज्ञ का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना और लोगों को एकजुट करना भी है। यही कारण है कि इस आयोजन में हर वर्ग, हर आयु और हर समुदाय के लोगों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। कार्यक्रम में उपस्थित संत-महात्माओं ने अपने प्रवचनों में कहा कि भारतीय संस्कृति की आत्मा यज्ञ, कथा और सत्संग में बसती है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हैं तथा समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना करते हैं। उन्होंने लोगों से आपसी प्रेम, भाईचारा, सद्भाव और मानव सेवा को जीवन का मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया। महामंडलेश्वर एवं विभिन्न धार्मिक संगठनों से जुड़े संतों ने कहा कि विश्व शांति महायज्ञ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का संकल्प है। आज जब दुनिया विभिन्न प्रकार के तनाव, संघर्ष और चुनौतियों से गुजर रही है, तब ऐसे आयोजन शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक जागरण का संदेश देते हैं। समापन अवसर पर आयोजित विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति एवं स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा। पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन, स्वच्छता और धार्मिक गरिमा का उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिला। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक और प्रेरणादायी बताया। आयोजकों ने बताया कि इस महायज्ञ और श्रीराम कथा महोत्सव के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक जागरण, सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम की सफलता में क्षेत्र के श्रद्धालुओं, समाजसेवियों, युवाओं तथा सहयोगी समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम का संचालन सुनील सिंह ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर किरणानंद गिरी महाराज, संरक्षक राजा मिश्रा, नागेश्वर प्रसाद गोंड़, श्यामा चरण गिरी, संतोष साहनी, राजकुमार टप्पू, अजय साहनी, संदीप चौरसिया, राजेन्द्र जी, राजकुमार निषाद सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, संत-महात्मा एवं हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। विश्व शांति, सामाजिक समरसता और मानव कल्याण का संदेश देते हुए संपन्न हुआ यह सात दिवसीय धार्मिक महोत्सव क्षेत्रवासियों के लिए लंबे समय तक आस्था, प्रेरणा और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बना रहेगा। मेड़र माता मंदिर परिसर में सात दिनों तक बही भक्ति की यह गंगा श्रद्धालुओं के हृदय में धर्म, सेवा और मानवता के नए संस्कारों का संचार कर गई।

Shakeer Akhtar
Author: Shakeer Akhtar

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