*डीएम अरविन्द सिंह के निर्देश पर उर्वरक विक्रय केंद्रों का सघन निरीक्षण, किसानों को निर्धारित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने के निर्देश*
*जनपद में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार, अफवाहों पर ध्यान न दें किसान: जिला कृषि अधिकारी*

*कालाबाजारी, ओवररेटिंग व टैगिंग करने वाले विक्रेताओं पर होगी कठोर वैधानिक कार्रवाई*
एटा, 27 जुलाई 2026। जिलाधिकारी अरविन्द सिंह के निर्देशानुसार जनपद में किसानों को शासन द्वारा निर्धारित दरों पर गुणवत्तायुक्त उर्वरकों की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा उर्वरक विक्रय केंद्रों एवं सहकारी समितियों का सघन निरीक्षण एवं सत्यापन अभियान लगातार संचालित किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि जिलाधिकारी अरविन्द सिंह ने पूर्व में स्वयं उर्वरक भंडारण स्थलों एवं गोदामों का निरीक्षण कर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जनपद का कोई भी किसान खाद के लिए भटकने को विवश न हो तथा प्रत्येक किसान को उसकी आवश्यकता के अनुसार निर्धारित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने नियमित निरीक्षण, स्टॉक सत्यापन एवं वितरण व्यवस्था की सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए थे। जिलाधिकारी के इन्हीं निर्देशों के क्रम में जिला कृषि अधिकारी द्वारा आज व्यापक निरीक्षण एवं सत्यापन की कार्रवाई की गई।
निरीक्षण के दौरान जनपद के विभिन्न निजी उर्वरक विक्रय प्रतिष्ठानों एवं सहकारी समितियों पर उर्वरकों के उपलब्ध स्टॉक, स्टॉक एवं विक्रय रजिस्टर, कैश मेमो, मूल्य सूची तथा अन्य अभिलेखों का गहन परीक्षण किया गया। सभी विक्रेताओं एवं समिति सचिवों को निर्देशित किया गया कि उर्वरकों का विक्रय केवल शासन द्वारा निर्धारित दरों पर किया जाए, प्रत्येक बिक्री पर किसान को अनिवार्य रूप से कैश मेमो उपलब्ध कराया जाए तथा विक्रय केंद्रों पर मूल्य सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित रखी जाए।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. मनवीर सिंह ने बताया कि वर्तमान में जनपद में लगभग 29,511 मीट्रिक टन यूरिया, 11,520 मीट्रिक टन डीएपी तथा 4,229 मीट्रिक टन एनपीके सहित अन्य सभी प्रकार के उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। जनपद में उर्वरकों की किसी प्रकार की कमी नहीं है तथा किसानों को उनकी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार निरंतर उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह अथवा भ्रामक सूचना पर विश्वास न करें तथा अनावश्यक अग्रिम खरीद से बचें। किसान अपनी फसल की आवश्यकता एवं कृषि वैज्ञानिकों की संस्तुतियों के अनुसार ही उर्वरकों का क्रय एवं उपयोग करें। संतुलित उर्वरक प्रयोग से उत्पादन लागत में कमी, फसल उत्पादकता में वृद्धि तथा भूमि की उर्वरा शक्ति का संरक्षण संभव है।
जिला कृषि अधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कोई उर्वरक विक्रेता निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक विक्रय करता है, कालाबाजारी करता है, स्टॉक छिपाता है, टैगिंग करता है अथवा उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के प्रावधानों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध बिना किसी शिथिलता के कठोर वैधानिक एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि कृषि विभाग किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा जिलाधिकारी अरविन्द सिंह के मार्गदर्शन में जनपद में उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है, जिससे प्रत्येक किसान को समय पर, पारदर्शी एवं निर्धारित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके।जिला सूचना कार्यालय एटा 👆








