इंडिया गठबंधन की बैठक में सियासी तकरार! वाम दलों की नाराजगी पर राहुल गांधी की सफाई, ममता बनर्जी ने उठाया बंगाल चुनाव का मुद्दा।
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ विपक्षी दलों की साझा रणनीति तैयार करने के लिए सोमवार को राजधानी दिल्ली में इंडिया गठबंधन की अहम बैठक हुई। बैठक में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समेत 25 दलों के शीर्ष नेता शामिल हुए।
बैठक के दौरान गठबंधन के भीतर तालमेल की कमी, नियमित बैठकों का अभाव और विभिन्न राज्यों में सहयोगी दलों के बीच मतभेद जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। वाम दलों ने कांग्रेस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कई बार उन्हें भाजपा की ‘बी टीम’ बताया जाता है, जिससे गठबंधन की भावना को नुकसान पहुंचता है।
इस पर राहुल गांधी ने सफाई देते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर सभी दल एक साथ हैं, लेकिन राज्यों की चुनावी परिस्थितियों के कारण स्थानीय नेताओं को अलग-अलग राजनीतिक बयान देने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि वाम दलों के नेताओं के साथ उनके अच्छे संबंध हैं और किसी प्रकार का व्यक्तिगत विवाद नहीं है।
बैठक में राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव ने भी गठबंधन के भीतर बेहतर समन्वय और नियमित बैठकों की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं, कुछ दलों ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) को गठबंधन में अधिक सक्रिय भूमिका देने की मांग उठाई।
ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के चुनावों का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान केंद्रीय एजेंसियों और अर्द्धसैनिक बलों का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने सुझाव दिया कि इंडिया गठबंधन का एक प्रतिनिधिमंडल बंगाल भेजा जाए, ताकि वहां की स्थिति का अध्ययन कर देश के सामने वास्तविक तस्वीर रखी जा सके।
बैठक में नेताओं ने माना कि भारतीय जनता पार्टी का प्रभावी मुकाबला करने के लिए केवल राजनीतिक बयान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मजबूत तालमेल और साझा रणनीति की भी आवश्यकता है। साथ ही युवाओं के बीच बढ़ रही राजनीतिक नाराजगी और नए राजनीतिक समीकरणों पर भी चर्चा की गई।
इंडिया गठबंधन की इस बैठक ने जहां विपक्षी एकता का संदेश दिया, वहीं गठबंधन के भीतर मौजूद मतभेदों और चुनौतियों को भी उजागर कर दिया। आगामी चुनावों को देखते हुए विपक्षी दल अब संगठनात्मक मजबूती और आपसी समन्वय बढ़ाने पर जोर देने की तैयारी में हैं।









