*जलेसर की जनता के साथ खुला विश्वासघात, आगरा-अयोध्या मार्ग पर रोडवेज सेवा ठप, गड्ढों में दफन हुआ विकास का दावा*
*तुर्रम सिंह राजपूत✍️*
एटा। 5 जून, जलेसर क्षेत्र की जनता आज दोहरी मार झेलने को मजबूर है। एक ओर सड़कों की बदहाल स्थिति ने आवागमन को नरक बना दिया है, तो दूसरी ओर परिवहन विभाग की घोर उदासीनता ने लाखों लोगों को रोडवेज सुविधा से वंचित कर दिया है। आगरा और अयोध्या जैसे महत्वपूर्ण गंतव्यों के लिए नियमित बस सेवा न होना प्रशासनिक विफलता का जीवंत प्रमाण बन चुका है।
क्षेत्र की सड़कों पर जगह-जगह जलभराव और गहरे गड्ढों ने हालात इतने भयावह कर दिए हैं कि भारी वाहन तक कीचड़ में फंस रहे हैं। कई मार्गों पर सड़क और तालाब में अंतर करना मुश्किल हो गया है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है। जनता सवाल पूछ रही है कि आखिर विकास के बड़े-बड़े दावों का सच इन टूटी सड़कों और गड्ढों में क्यों दिखाई दे रहा है?
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि जलेसर डिपो से दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, मथुरा और वृंदावन के लिए बसें संचालित की जा रही हैं, लेकिन आगरा जैसे प्रमुख व्यापारिक, शैक्षणिक और चिकित्सकीय केंद्र के लिए पर्याप्त रोडवेज सेवा उपलब्ध नहीं है। अयोध्या धाम जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के लिए भी सीधी और नियमित बस सेवा का अभाव जनता की पीड़ा को और बढ़ा रहा है।
व्यापारियों को कारोबार के लिए, विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए तथा मरीजों को उपचार के लिए प्रतिदिन आगरा का रुख करना पड़ता है। लेकिन रोडवेज सुविधा न होने के कारण उन्हें निजी वाहनों और महंगे साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है, जिनकी जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वर्षों से मांग उठने के बावजूद परिवहन विभाग और प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जनता को मूलभूत परिवहन सुविधा तक उपलब्ध न करा पाना सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता को उजागर करता है।
क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही जलेसर-आगरा और जलेसर-अयोध्या मार्ग पर पर्याप्त रोडवेज बस सेवाएं शुरू नहीं की गईं तथा जर्जर सड़कों की तत्काल मरम्मत नहीं कराई गई, तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर केवल भाषण नहीं, बल्कि धरातल पर सुविधाएं चाहिए।
जलेसर की जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर उसकी उपेक्षा कब तक जारी रहेगी। गड्ढों में तब्दील सड़कें, ठप परिवहन व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी यह साबित कर रही है कि आम नागरिकों की समस्याएं फिलहाल सरकारी प्राथमिकताओं में शामिल नहीं हैं।
@all









