वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद यूसुफ खान के खास रिपोर्ट।
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मोदी के संसदीय क्षेत्र में स्वच्छता अभियान फेल? वाराणसी के जगतगंज में कचरे के ढेर पर बैठा है सिस्टम, जनता में भारी आक्रोश- एके बिंदुसार संस्थापक बी एम एफ, नेशनल कोर कमेटी
विश्व की सांस्कृतिक राजधानी कही जाने वाली काशी की गलियों में गंदगी का अंबार, प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट की जमीनी हकीकत पर उठे सवाल- एके बिंदुसार संस्थापक बी एम एफ, नेशनल कोर कमेटी
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*वाराणसी।* विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता और भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी, जिसे पूरी दुनिया सांस्कृतिक राजधानी के रूप में जानती है, आज अपनी ही सफाई व्यवस्था पर शर्मिंदा है।
जगह-जगह सफाई की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में जबरदस्त गुस्सा है। लोग खुलकर कह रहे हैं कि अगर यही हाल रहा तो आने वाले चुनाव में इसका असर जरूर दिखेगा।
*जगतगंज, प्रदीप होटल के पीछे का हाल सबसे बुरा*
इस बदहाली की सबसे भयावह तस्वीर वाराणसी के हृदयस्थल कहे जाने वाले जगतगंज क्षेत्र में देखने को मिल रही है। प्रदीप होटल के पीछे वाली गली में पिछले कई दिनों से सफाई नहीं हुई है। आलम यह है कि गली में कचरे के ढेर लगे हैं, नालियां चोक हैं और बदबू से लोगों का सांस लेना दुश्वल हो गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार नगर निगम और पार्षद से शिकायत की गई, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला, सफाई नहीं।
> “हम प्रधानमंत्री जी के संसदीय क्षेत्र के निवासी हैं, हमें गर्व है। लेकिन जब हमारे घर के सामने महीनों कचरा पड़ा रहता है तो मन में सवाल उठता है कि क्या हमारी आवाज दिल्ली तक पहुंच भी रही है या नहीं?” – एक स्थानीय निवासी ने आक्रोश में कहा।
*स्वच्छ भारत मिशन को ठेंगा दिखा रहा है सिस्टम*
एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पूरे देश को स्वच्छ भारत का सपना दिखा रहे हैं, काशी को विश्वस्तरीय बनाने के लिए दिन-रात प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हीं के संसदीय क्षेत्र में बैठे जिम्मेदार अधिकारी उनके सपनों को पलीता लगा रहे हैं।
सवाल यह है कि जब प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र का यह हाल है, तो बाकी शहरों का क्या होगा?
अगर वाराणसी नगर निगम ने समय रहते आंखें नहीं खोलीं और जगतगंज जैसी गलियों की सफाई युद्धस्तर पर नहीं की, तो यह गंदगी सिर्फ सड़क पर नहीं, बल्कि जनता के मन में भी बैठ जाएगी। और लोकतंत्र में जनता के मन की गंदगी जब उबाल पर आती है, तो वह वोट की चोट से अपना हिसाब बराबर करती है।
प्रधानमंत्री जी, आपकी काशी पुकार रही है, कृपया सुन लीजिए!















