*एक कोस का विवाद, निशाने पर 2027 की सियासत*

*माफी के कुछ घंटे बाद फिर चेतावनी ने बढ़ाई हलचल, मलपुरा की पंचायत से निकली बात अब सियासी समीकरणों तक पहुंची*
*देवेश शर्मा पत्रकार की कलम से…*
मलपुरा की पंचायत में शुरू हुआ बाल योगी और फतेहपुर सीकरी विधायक चौधरी बाबूलाल का विवाद अब केवल जुबानी जंग नहीं रह गया है। इसके पीछे 2027 की सियासी हलचल भी दिखाई देने लगी है। हालांकि बाल योगी ने फतेहपुर सीकरी सांसद राजकुमार चाहर और आगरा दक्षिण से विधायक एवं प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय पर भी सवाल किए थे।
मलपुरा आगरा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में आता है, जहां से भाजपा की बेबीरानी मौर्य विधायक और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। दूसरी ओर, चौधरी बाबूलाल फतेहपुर सीकरी से भाजपा विधायक हैं। वहीं बाल योगी के 2027 में आगरा दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की चर्चा है।
यही वजह है कि मलपुरा की पंचायत में कही गई बात और उसके बाद की घटनाओं को केवल व्यक्तिगत विवाद मानकर छोड़ देना आसान नहीं है। हालांकि इसके पीछे कोई राजनीतिक रणनीति है, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी।
विवाद की शुरुआत बाल योगी के पंचायत में दिए बयान से हुई। विधायक के खिलाफ कथित अपशब्दों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो चौधरी बाबूलाल ने एफआईआर कराने की बात कही। इसके बाद बाल योगी बुधवार दोपहर विधायक के जयपुर हाउस स्थित आवास पहुंचे और माफी मांगी। लगा कि विवाद खत्म हो गया। हालांकि विधायक समर्थकों ने इसे दूसरे अंदाज में पेश किया, शाम होते-होते कहानी फिर बदल गई। बाल योगी ने सोशल मीडिया पर एक मिनट 41 सेकेंड का वीडियो जारी कर विधायक को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि गलती से भी मत सोचना कि बाल योगी झुक जाएगा और 84 कोस की परिक्रमा का जिक्र करते हुए ‘एक कोस में परेशान करने’ तथा ‘ऑपरेशन’ करने जैसी बातें कही।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल पैदा होता है—माफी के बाद फिर चेतावनी क्यों?
राजनीति में समय और स्थान दोनों मायने रखते हैं। 2027 के चुनाव की तैयारी में नए चेहरे अपनी जमीन तलाश रहे हैं। ऐसे में किसी विवाद को केवल व्यक्तिगत मान लेना भी उतना ही अधूरा है, जितना हर बयान को राजनीतिक साजिश मान लेना।
कटु सत्य यह है कि इस पूरे विवाद में मलपुरा की मूल समस्या—सीवर—पीछे छूट गई है। जनता को यह जानना चाहिए कि सीवर की समस्या का समाधान कब होगा, लेकिन चर्चा अब इस बात पर है कि किसने किसे क्या कहा और कौन किसे चेतावनी दे रहा है।
2027 अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक जमीन तैयार होने में समय नहीं लगता। यदि बाल योगी वास्तव में आगरा दक्षिण से चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं, तो उनके हर सार्वजनिक कदम को राजनीतिक चश्मे से देखा जाना स्वाभाविक है।
लेकिन इतना साफ है कि एक कोस का यह विवाद अब 2027 की राजनीति की चर्चा तक पहुंच चुका है।
*विधायक चौधरी बाबूलाल का कहना है कि माफी मांगने के बाद अगर कोई कुछ बोले, तो जवाब देकर तवज्जो देना बेकार है। कहने को तो प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भी लोग जो मन आए कहते हैं, लेकिन जनता की सेवा करने वाले लोग सिर्फ जनहित पर केंद्रित रहते हैं।*














