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कुर्मा ग्रामम: आंध्र का वो गांव जहाँ 21वीं सदी को आने की इजाजत नहीं,BMF News

*कुर्मा ग्रामम: आंध्र का वो गांव जहाँ 21वीं सदी को आने की इजाजत नहीं*

*भिलाई से 1000 किमी दूर आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में एक गांव है – *कुर्मा ग्रामम*। ,*यहां घुसते ही लगता है जैसे आप 200 साल पीछे चले गए हों।*

*यहां न बिजली है, न मोबाइल टावर, न टीवी, न वाशिंग मशीन। सिर्फ एक लैंडलाइन फोन है पूरे गांव के लिए।*

*क्यों बना ये गांव?*
*2018 में ISKCON के स्वामी प्रभुपाद के शिष्यों ने इसे बसाया था। मकसद था – वैदिक जीवन को वापस जीना। नाम पास के प्रसिद्ध श्रीकूर्मम मंदिर से लिया गया, जो दुनिया का इकलौता मंदिर है जहाँ भगवान विष्णु कछुए के अवतार में हैं।*

*यहां कैसे रहते हैं लोग?*
*आज यहाँ 17 परिवारों के 85 लोग रहते हैं। इनमें कोई सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, कोई डॉक्टर, कोई ओडिशा का किसान – सबने शहर की भागदौड़ छोड़कर ये जीवन चुना है।*

*घर:* *सीमेंट-लोहे से नहीं, बल्कि मिट्टी, चूना, गुड़ और तुअर दाल के मिश्रण से बने हैं। इन्हें _पेंकुटिल्लू_ कहते हैं। फर्श हर हफ्ते गोबर-मिट्टी से लीपा जाता है।*
*दिनचर्या:* *सुबह 3:30 बजे उठना, 4:30 बजे भागवत गीता पाठ, फिर गो-सेवा, खेती, हथकरघा पर कपड़ा बुनना। शाम 8:30 बजे सब सो जाते हैं।*
*खाना:* *चूल्हे पर बनता है, साबुन की जगह राख और रीठा। दिन में 3 बार ही खाना, सूर्यास्त के बाद सिर्फ दूध।*- *बच्चे:* *गुरुकुल में संस्कृत, वेद और वैदिक गणित पढ़ते हैं, न कि मोबाइल गेम।*

*60 एकड़ में ये लोग खुद 198 बोरी अनाज और सब्जी उगाते हैं। बाजार से कुछ नहीं लाना पड़ता।*

*आज हर वीकेंड 400 से ज्यादा लोग यहाँ आते हैं ये देखने कि बिना बिजली-बिल और EMI के भी इंसान कितना शांत रह सकता है।*

*ये गांव हमें सिखाता है कि सुख सुविधाओं में नहीं, सादगी में है।*

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