मेड़र माता मंदिर पर चल रहे सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के चौथे दिन राम-सीता विवाह प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।

रिपोर्ट: सत्यदेव पांडे ( ब्यूरो चीफ- सोनभद्र)

  • मंगल गीतों के साथ सीता-राम के जयकारों से पंडाल गूंज उठा।

‌ चोपन/ सोनभद्र/कथावाचक दिलीप कृष्ण भारद्वाज ने श्रीराम-सीता के विवाह की कथा सुनाते कहा कि राजा जनक के दरबार में भगवान शिव का धनुष रखा हुआ था। एक दिन सीता ने घर की सफाई करते हुए उसे उठाकर दूसरी जगह रख दिया। उसे देख राजा जनक को आश्चर्य हुआ, क्योंकि धनुष किसी से उठता नहीं था। राजा ने प्रतिज्ञा ली कि जो इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। उन्होंने स्वयंवर की तिथि निर्धारित कर सभी राजा- महाराजा को विवाह के लिए निमंत्रण भेजा। वहां आए सभी राजाओं ने एक-एक कर धनुष को उठाने की कोशिश की, लेकिन किसी को भी इसमें सफलता नहीं मिली। गुरु की आज्ञा से श्री राम धनुष उठा प्रत्यंचा चढ़ाने लगे तो वह टूट गया। इसके बाद धूमधाम से सीता व राम का विवाह हुआ। माता सीता ने जैसे प्रभुराम को वर माला डाली वैसे ही देवतागण उन पर फूलों की वर्षा करने लगे।इस अवसर पर चोपन ही नहीं बल्कि पूरे सोनभद्र के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित कार्यकरम आयोजक शिवकुमार पहाड़ी बाबा
संरक्षक श्री राजा मिश्राजी श्री नागेश्वर सिंह गौड़ श्री सुनील सिंह श्री श्यामाचरण गिरी श्री संतोष साहनी श्री राजकुमार यादव पप्पू अजय साहनी राजकुमार साहनी रवि शंकर साहनी महेंद्र गोंड राजेंद्र संदीप जी अनिल चौरसिया जी रमाशंकर निषाद श्रवण जी यहां हजारों भक्त उपस्थित रहे

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Author: Shakeer Akhtar

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