मिशन ‘पार्ट-5’
भारतीय मीडिया फाउंडेशन (BMF) नेशनल कोर कमेटी ने पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्वरूपों— प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल— के समन्वय से एक वैचारिक और व्यवस्थागत क्रांति, इस ‘त्रिकोणीय संगम’ का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि मीडिया को उसकी खोई हुई गरिमा वापस दिलाना और इसे संवैधानिक शक्ति प्रदान करना है।
एके बिंदुसार
संस्थापक
भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल कोर कमेटी)
नई दिल्ली।
मिशन: त्रिकोणीय संगम (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया)
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी की महा-रणनीति,
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी का मानना है कि जब तक मीडिया के ये तीनों अंग एक सूत्र में नहीं बंधेंगे, तब तक “मीडिया सरकार” का सपना साकार नहीं होगा। इस त्रिकोणीय संगम के पांच प्रमुख आधार स्तंभ निम्नलिखित हैं:
1. प्रिंट मीडिया: ‘नींव की ईंट’ और प्रमाणिकता का आधार
प्रिंट मीडिया इस संगम का सबसे पुराना और विश्वसनीय हिस्सा है। कोर कमेटी का मानना है कि डिजिटल के शोर में ‘अक्षर’ ही अंतिम प्रमाण है।
रणनीति: ग्रामीण और जिला स्तर के लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों को संगठित करना।
मिशन: प्रिंट मीडिया के माध्यम से ‘खोजी पत्रकारिता’ को जीवित रखना, ताकि शासन-प्रशासन की फाइलों में दबे भ्रष्टाचार को उजागर कर उसे ‘ऐतिहासिक दस्तावेज’ बनाया जा सके।
लक्ष्य: विज्ञापन वितरण में पारदर्शिता और छोटे भाषाई समाचार पत्रों के लिए सरकारी संरक्षण सुनिश्चित करना।
2. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया: ‘प्रभावी आवाज’ और तत्काल प्रभाव
टीवी और वीडियो पत्रकारिता की शक्ति को नकारना संभव नहीं है। कोर कमेटी इसे जनता की आवाज को ‘ऊँचा’ करने का माध्यम मानती है।
रणनीति: क्षेत्रीय स्तर पर काम कर रहे वीडियो पत्रकारों और स्वतंत्र कैमरामैनों को एक मंच पर लाना।
मिशन: ‘मीडिया जनसुनवाई’ जैसे कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण (Live) सुनिश्चित करना, ताकि दोषी अधिकारी की जवाबदेही तुरंत तय हो सके।
लक्ष्य: इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से ‘नागरिक पत्रकारिता’ को सशक्त बनाना और भ्रामक खबरों (Fake News) के बजाय जन-सरोकार की खबरों को प्राइम टाइम में लाना।
3. डिजिटल मीडिया: ‘रफ़्तार’ और वैश्विक विस्तार
डिजिटल मीडिया इस संगम का सबसे आधुनिक और तेज हथियार है। यह संगठन की आवाज को पल भर में देश के कोने-कोने तक पहुँचाता है।
रणनीति: सोशल मीडिया (YouTube, WhatsApp, Twitter, Facebook) का उपयोग कर ‘इंटरनेशनल मीडिया आर्मी’ का विस्तार करना।
मिशन: वेबसाइट्स और पोर्टल्स के माध्यम से RTI (सूचना का अधिकार) का व्यापक उपयोग कर भ्रष्टाचार की पोल खोलना।
लक्ष्य: डिजिटल पत्रकारों को ‘मान्यता’ दिलाने के लिए संघर्ष करना और उन्हें तकनीकी रूप से इतना सक्षम बनाना कि वे किसी भी बड़े संस्थान के समकक्ष खड़े हो सकें।
4. नेशनल कोर कमेटी की ‘क्रांति’ और मांगें
इस त्रिकोणीय संगम के माध्यम से फाउंडेशन निम्नलिखित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए “आंदोलन” की राह पर है:
संवैधानिक दर्जा (The Fourth Pillar): मीडिया को केवल कहावत में नहीं, बल्कि संविधान की किताब में ‘चौथा स्तंभ’ घोषित करवाना।
पत्रकार सुरक्षा कानून (Media Protection Act): फील्ड में रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए सख्त केंद्रीय कानून की मांग।
मीडिया प्रतिनिधियों का 10% आरक्षित कोटा: राज्यसभा और विधान परिषदों में पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए 10% सीटों का आरक्षण, ताकि मीडिया की आवाज सीधे संसद में गूँजे।
मीडिया एवं सामाजिक कार्यकर्ता कल्याण बोर्ड: पत्रकारों के लिए पेंशन, आवास और स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाओं के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय बोर्ड का गठन।
5. ‘मीडिया सरकार’ का विजन और आगामी योजना
भारतीय मीडिया फाउंडेशन का ‘पार्ट-5’ मिशन स्पष्ट करता है कि मीडिया अब केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन का भागीदार है।
मिशन प्रेस : 2026 के अंत तक देश के हर जिले में ‘मीडिया जनसुनवाई’ केंद्रों की स्थापना।
कश्मीर से कन्या कुमारी तक की गूँज:
जैसे आंदोलनों के माध्यम से यह संदेश देना कि यदि एक छात्र या आम नागरिक के साथ अन्याय होगा, तो पूरा ‘त्रिकोणीय संगम’ (प्रिंट, टीवी, डिजिटल) एक साथ मिलकर सरकार को घेर लेगा।
भारतीय मीडिया फाउंडेशन की नेशनल कोर कमेटी का यह त्रिकोणीय संगम भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में एक नई लकीर खींचने जा रहा है। प्रिंट का धैर्य, इलेक्ट्रॉनिक का असर और डिजिटल की रफ़्तार जब एक साथ मिलेंगे, तभी भ्रष्टाचार मुक्त और सशक्त भारत का निर्माण होगा।
> “कलम, कैमरा और की-बोर्ड की एकता ही असली लोकतंत्र की गारंटी है।”
भारतीय मीडिया फाउंडेशन
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