WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.48 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50 PM

जेठ की दुपहरी में, छांँव जैसी लगती है।*  – विनोद सांवरिया , रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

*जेठ की दुपहरी में, छांँव जैसी लगती है।*

– विनोद सांवरिया

*काव्य गोष्ठी – एक शाम मांँ के नाम।*

 

 

 

बाह।गुरुकुल पब्लिक स्कूल की मेजबानी में “एक शाम मां के नाम” काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि देव नारायण शर्मा जी ने की, संचालन गीतकार विनोद सांवरिया ने किया।

सभी कवियों का स्वागत आयोजक पवन टाइगर (बाबा) ने किया।

कवि गोष्ठी में – देव नारायन शर्मा, गणेश शंकर विद्यार्थी, हरि नारायण नमन, पवन शर्मा, ब्रजेश सिंह, सरोज पाठक (भिंड), राकेश शर्मा (आगरा), विनोद सांवरिया, राहुल परिहार, डॉ आकाश शर्मा, पवन टाइगर आदि ने काव्य पाठ किया।

 

काव्यांश..

 

जेठ की दुपहरी में, छांँव जैसी लगती है।

प्रीति और ममता की,ठाँव जैसी लगती है।

सारे कष्ट सहकर भी, मुस्कुराती है जब मांँ,

शहरी आपाधापी में, गांँव जैसी लगती हैं।

– विनोद सांँवरिया

 

बेशक तनहा निकला हूं मैं सूनी सूनी राहों में

रहता हूं हर वक्त मगर अपनी मां की निगाहों में

जब जब बड़ी आपदाओं ने मुझ को आ कर घेरा है

छू कर सिमट गईं हैं वो ये असर है मां की दुआओं में

– राकेश शर्मा

 

भूषणम चेष्टा पड़ोस ध्यानम

अहर्निश निद्रा तथैव च।

शॉपिंग जीवी इंस्ट्राकरीबी अधुना

पत्नियां पंच लक्षणम।।

-नारायन हरी “नमन”

 

सुना है शहर में तबाही हुई है।

न देखो उसे ये मुनादी हुई है।।

दिलों में लगी आग जो देखते हो,

कि ये आग उसकी लगायी हुई है।

– कवि ब्रजेश कुमार

यादों का रहम बाम है बटेश्वर

वारों में जिंदा शाम है बटेश्वर

तुम भी इस बा जाके देखिए अनुज

भोले बाबा का धाम है बटेश्वर

– पवन शर्मा पवन

तुझको देखूं तो लगता है ग़ज़ल लिखूं

फिर लगता है कि आज नहीं कल लिखूं

लिखने को लिखूं बीता हर पल

फिर सोचता हूं कि आज नहीं कल लिखूं

– राहुल परिहार

देखती क्यों माँ अभी से भाग्य रेखा क्या पता।

चाक पर मिट्टी रखी है क्या बनेगा क्या पता।।

आज गिरवी रख दिए हैं आखिरी कंगन बचे।

बाद में तकदीर बदलेगा भी बेटा क्या पता।।

~आशीष सरोज थापक

 

तलवार चली फिर चलकर के, गुरु रामदास की शिष्य बनी।

मुगलों का बनके भूत और भारत का अटल भविष्य बनी।

– गणेश शर्मा ‘विद्यार्थी’

 

कवि गोष्ठी में, दीपक जादूगर, नरेन्द्र भारती, एड प्रशान्त राजपूत, राजा राजपूत, अभय शर्मा, राजकुमार शर्मा, बंटू पंडित, अद्दे मियां आदि लोग उपस्थित रहे।

Leave a Comment