मारहरा में खाकी ही खनन माफिया!” थानाध्यक्ष पर रिश्वत लेकर अवैध खनन कराने के सनसनीखेज आरोप, रिपोर्ट जगदीश कुमार

*“मारहरा में खाकी ही खनन माफिया!” थानाध्यक्ष पर रिश्वत लेकर अवैध खनन कराने के सनसनीखेज आरोप*

 

 

*ऑडियो-वीडियो से खुली पोल, तीन महीने से चल रहा खेल; पुलिस गाड़ी पहुंचकर भी लौटी बैरंग—अब किसका संरक्षण?*

 

एटा (मारहरा)।

जनपद के थाना मारहरा क्षेत्र में अवैध खनन का ऐसा संगठित खेल सामने आया है, जिसने पुलिस विभाग की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आरोप सीधे थानाध्यक्ष कृष्णकांत लोधी पर हैं—कि उनकी सरपरस्ती में रात के अंधेरे में मिट्टी का अवैध खनन बेखौफ जारी है और बदले में मोटी “महीनादारी” वसूली जा रही है।

दैनिक भास्कर की टीम जब मौके पर पहुंची तो जमीनी हकीकत कैमरे में कैद हो गई। जीपीएस लोकेशन के साथ खींचे गए फोटो और वीडियो इस बात की तस्दीक करते हैं कि खनन कोई छुपा खेल नहीं, बल्कि खुलेआम चल रहा कारोबार है। मौके पर मौजूद ट्रैक्टर चालक ने बातचीत में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि यह धंधा पिछले तीन महीने से लगातार जारी है और हर महीने थाना स्तर तक पैसे पहुंचाए जाते हैं।

 

*“साहब तक जाता है पैसा”—ऑडियो में कबूलनामा*

 

कुटेना माफी निवासी पूरन सिंह लोधी का नाम भी इस नेटवर्क में सामने आया है। वायरल ऑडियो में कथित तौर पर वह यह कहते हुए सुना जा सकता है कि “साहब को महीनादारी दी जाती है, तभी काम चलता है।” यह ऑडियो अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और पुलिस-खनन गठजोड़ की परतें खोल रहा है।

 

*मौके पर पहुंची पुलिस, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई!”*

 

एक अन्य वायरल वीडियो ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। वीडियो में ट्रैक्टर चालक साफ कह रहा है कि “मारहरा थाने की सफेद गाड़ी मौके पर आई थी, लेकिन बिना कोई कार्रवाई किए वापस लौट गई।” सवाल उठता है—क्या यह महज संयोग है या फिर सब कुछ सेटिंग का हिस्सा?

 

*कानून के रखवाले या खनन के साझेदार?*

 

प्रदेश सरकार जहां अवैध खनन पर सख्ती की बात करती है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जिस थाने की जिम्मेदारी कानून व्यवस्था बनाए रखने की है, अगर वहीं से अवैध कारोबार को संरक्षण मिले तो आम जनता आखिर किस पर भरोसा करे?

 

*रात के अंधेरे में धड़ल्ले से कट रही धरती*

 

सूत्रों के मुताबिक, खनन का खेल सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि हर रात जमीन पर चल रहा है। ट्रैक्टरों की आवाज, मशीनों की गड़गड़ाहट और पुलिस की कथित चुप्पी—सब कुछ मिलकर एक बड़े खेल की ओर इशारा कर रहे हैं। यदि उच्चाधिकारी अभी मौके पर पहुंचें तो रंगे हाथों पूरा नेटवर्क पकड़ा जा सकता है।

 

*उच्चाधिकारियों की चुप्पी पर भी सवाल*

 

इतने ठोस ऑडियो-वीडियो साक्ष्य सामने आने के बावजूद अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होना भी कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या यह मामला दबा दिया जाएगा या फिर दोषियों पर गिरेगी गाज?

 

*जनता में उबाल, सख्त कार्रवाई की मांग*

 

स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर इस बार भी कार्रवाई नहीं हुई तो यह साफ हो जाएगा कि अवैध खनन को ऊपर तक संरक्षण प्राप्त है।

 

 

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