*सख्त कार्रवाई, चेतावनी :राजस्व परिषद का सभी जनपदों को अल्टीमेटम, आदेश नहीं माना तो होगी कार्रवाई*

*क्या जनपद एटा में होगा न्याय, अब देखना यह है कि जिलाधिकारी अरविंद सिंह बोर्ड के आदेशों का पालन करते हुए लंबे समय से जमे कर्मचारियों को हटाएंगे या नहीं….*
*लखनऊ/ एटा उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों के तबादलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। आयुक्त एवं सचिव ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को 02-07-2026 को जारी पत्र में तत्काल अनुपालन का अल्टीमेटम दिया है। साथ कार्यवाही के संकेत भी दिए है.
परिषद ने साफ कहा कि शासनादेश 13-05-2022 और परिषद आदेश 18-05-2026 के तहत हर 3 साल में पटल/क्षेत्र परिवर्तन अनिवार्य है। कोई भी कर्मचारी तहसील में 10 साल और कलेक्ट्रेट में 15 साल से ज्यादा नहीं रह सकता। संवेदनशील पदों पर 5 साल से ज्यादा तैनाती प्रतिबंधित है।
मामला तब तूल पकड़ा जब मिनिस्टीरियल कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ ने हाईकोर्ट में रिट 9187/2026 दाखिल की। 17-06-2026 को हाईकोर्ट ने भी *20-06-2008 और 13-10-2023 के शासनादेशों* के अनुपालन पर जवाब तलब किया। अगली सुनवाई 24-06-2026 को थीं। तब तक परिषद ने प्रदेश के सभी जनपदों से आख्या मांगी है. अगर आख्या देने के बाद भी यह महसूस किया जाता है कि परिषद व कोर्ट के आदेश की अवहेलना हो रहीं है तब IAS स्तर के अधिकारियो के खिलाफ शासन को भी कोर्ट निर्देश दे सकता है. परिषद की अहम मीटिंग में यह भी चर्चा का केंद्र रहा कि कभी कभी अधिकारी अपने चहेतें लिपिको का कागजी स्थानांतरण तो कर देते है परन्तु उन्हें संबंदीकरण अपने ही कार्यालय में रखा जाता है, जिससे भ्रष्टाचार की जड़े और मजबूत होती जाती है जिससे सरकार और शासन की छवि धूमिल होती है. ऐसे प्रकरण शासन स्तर पर कई बार आये है जिन पर कड़ी कार्यवाही भी की गई है.
शासन स्तर पर जनप्रतिनिधि यह भी शिकायत करते है कि IAS स्तर के अधिकारी एक ही लिपिक को कई बरसो तक अपने स्तर पर चिपका के रखते है जिससे जनप्रतिनिधियों के द्वारा कई बार मुख्यमंत्री स्तर पर जिलाधिकारियों की लिखित शिकायत की जाती रहीं है परन्तु अब ऐसा कतई बर्दास्त नहीं किया जायेगा।
*राजस्व परिषद ने चेताया कि जिन जिला अधिकारियों ने अब तक पटल परिवर्तन की सूची नहीं भेजी*, वे आज ही स्थिति स्पष्ट करें। आदेशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई तय है। कोर्ट को भी वस्तुस्थिति से अवगत कराया जाएगा। परिषद का संदेश साफ है: नियम सबके लिए बराबर, लापरवाही बर्दाश्त नहीं।
अब आपको यह भी बता देते है कि एटा जनपद में कई कर्मचारी आज भी तीन वर्ष से एक ही पटल पर मलाई की थाली चाट रहें है और कई ऐसे भी कर्मचारी है जो कई बर्षो से कलेक्ट्रेट पर ही काबिज है। इसके पीछे जिलाधिकारियों की लापरवाही साफ नजर आती है।
*आपको बता दे कि जो आपको जानना बेहद जरुरी भी है
हमें आपको बताना इसलिए भी जरुरी है कि जो कर्मचारी सेवा के भाव से सरकारी सेवा में आते है और कई बरसों से एक ही पटल पर काबिज बने रहते है। यह सेवा नियमावली की साफ व सीधी अनदेखी है। जिससे आम नागरिक पीड़ित होता है और भ्रष्टाचार को अमृत मिलता रहता है. अब परिषद सहित कोर्ट के सज्ञान में यह मामले आ चुके है।
जनपद एटा में विनिमित क्षेत्र के *सेवानिवृत बाबू एम.एम.ओझा* आज भी जनपद एटा के विनिमित क्षेत्र विभाग को देख रहें है और पिछले दो बर्ष से सभी सरकारी फाईलो पर हस्ताक्षर किये जा रहें है आखिर ऐसे महत्वपूर्ण पद और सरकारी की नीतियों को सीधा प्रभावित करने वाले पद पर क्यों काबिज है। भ्रष्टाचार में पूरी तरह लिप्त एम एम ओझा पर जिलाधिकारी की नजर क्यों नहीं पड़ी.!!
*मनोज शर्मा LVC बाबू* आखिर एक सीट पर कितने बर्षो तक,एक ही सीट पर पिछले 6 बर्ष से काबिज है इसका कोई अलग से क़ानून आएगा तब अन्य कर्मचारियों को सेवा का मौका मिलेगा और न्याय होगा!जिस व्यक्ति की कलेक्टर पर नियुक्ति ही अवैध चल रहीं हो और कई बार सवाल उठ चुके हो. इस सीट पर बैठ कर अपने परिवार को नगर पालिका में ठेकेदारी भी करा रहें है. इसी को धमक कहते है.आखिर जिलाधिकारी कब इन्हे हटाओगे! तहसील अलीगंज में तैनात *बाबू हरिनन्दन* को पुरे तीन बर्ष होने के बाद भी तहसील अलीगंज से क्यों नहीं हटाया गया है आखिर *अलीगंज* तहसील पर ऐसा क्या धन गड़ा हुआ है जो एक ही आदमी उखाड़ के ले जायेगा और बाकी न्याय के लिए कतार पर खडे होंगे…!!
ADM प्रशासन स्टेनो रमा शर्मा* जिन्हे एक ही सीट पर रहते करीब 4 बर्ष हो चुके है जो कि नियम से अधिक हो चुका है,इन्हें इस सीट से इतना मोह हो गया है कि ये कहीं और जाना पसंद नहीं करती, और चपरासियों पर हुकूमत करती रहती है, इनका भी पटल परिवर्तन जनहित में नितांत आवश्यक है….
जिलाधिकारी एटा के *स्टेनो रत्नेश पांडे* जो कि अलीगढ स्थानांतरण होने के बाद भी पिछले छः माह के लिए मात्र अटैच किया गया था जो कि अधिक समय होने के बाद भी जिलाधिकारी एटा की महत्वपूर्ण सीट स्टेनो पर काबिज है आखिर ऐसा कौन सा नियम है जो लागू होता ही नहीं है. आखिर जिलाधिकारी पुरे जिले की सफाई कर पाएंगे या यूँही राजनीति होंगी.आखिर जिलाधिकारी एटा के आवास से जी न्याय की उम्मीद की जाती है, जनता वहीं से अन्याय देख रही है,
*अब देखना यह है कि न्यायप्रिय जिलाधिकारी अरविंद सिंह एटा में बोर्ड के आदेश का पालन करते हुए न्याय करेंगे या नहीं……..*









