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सौ दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान, आगरा में 62 शिविर, 1814 नए मरीज मिले – आगरा ने टीबी मरीज खोजने में प्रदेश में पहला स्थान पाया, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

सौ दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान, आगरा में 62 शिविर, 1814 नए मरीज मिले

– आगरा ने टीबी मरीज खोजने में प्रदेश में पहला स्थान पाया

– 100 दिवसीय विशेष अभियान के पहले चरण में ही आगरा ने रचा कीर्तिमान, समय पर इलाज से रुकेगा संक्रमण

आगरा, 28 अप्रैल 2026।

राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद में 24 मार्च से 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत अब तक 62 स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से 7116 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। जांच में 1814 टीबी मरीज मिले हैं, जिन्हें तुरंत उपचार पर रख दिया गया है। यह कहना है जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता का।

 

जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के सार्थक परिणाम सामने आ रहे हैं। अभियान के पहले माह की समीक्षा में टीबी मरीजों की पहचान के मामले में आगरा ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। इस एक माह के दौरान की गई जांच में नए टीबी मरीज सामने आए हैं। मरीजों की जल्दी पहचान होने से उनका तत्काल इलाज शुरू कर दिया गया है। समय पर उपचार शुरू होने से समुदाय स्तर पर टीबी का संक्रमण फैलने का खतरा कम होगा। इससे टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को और मजबूती मिलेगी।

 

100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान में आगरा सक्रिय–

डीटीओ ने बताया कि अभियान के दौरान कुल 13 स्कूलों में टीबी सेंसिटाइजेशन कर 960 छात्र-छात्राओं को टीबी के प्रति जागरूक किया गया है। नि:क्षय मित्र पहल के अंतर्गत अब तक कुल 62 नि:क्षय मित्र पंजीकृत हुए हैं। साथ ही टीबी मरीजों को पोषण पोटली भी प्रदान की गई है। टीबी मरीजों के परिवार के सदस्यों को टीबी से बचाव के लिए टीपीटी उपलब्ध कराई गई है।

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टीबी को हराना है, देश को टीबी मुक्त बनाना है–

यदि आपको या आपके आसपास किसी को 2 सप्ताह से खांसी, बलगम, बुखार, रात में सोते समय पसीना आना, बलगम के साथ खून आना, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, वजन कम होना, भूख न लगना, थकान, गर्दन में गिल्टी/गांठें या एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के कोई लक्षण दिखें तो तुरंत सरकारी अस्पताल में निःशुल्क जांच, उपचार और छाती का एक्स-रे कराएं। सभी सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। टीबी मरीजों को पोषण, सामाजिक और भावनात्मक सहयोग देने के लिए नि:क्षय मित्र बनें। कोई भी व्यक्ति, संस्था, जनप्रतिनिधि या कॉरपोरेट टीबी मरीज को गोद ले सकता है। आप मरीजों को पोषण किट, जांच सहायता या अन्य मदद देकर इस अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

डॉ. अरुण श्रीवास्तव,

मुख्य चिकित्सा अधिकारी आगरा

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