भारतीय जनता पार्टी का आज स्थापना दिवस मनाया जा रहा है लेकिन यह बहुत कम लोग जानते हैं कि वर्तमान में भारत की सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी की नींव रखने में एटा जिले का अति महत्वपूर्ण योगदान है –
ये बात बहुत बहुत ही कम लोगों को ज्ञात है कि भाजपा यानी कि तत्कालीन जनसंघ की स्थापना की रणनीति एटा जिले के अवागढ़ रियासत के राजा बलवंत सिंह जी के द्वितीय सुपुत्र राव०कृष्ण पाल सिंह के नेतृत्व में ही हुई थी। जनसंघ को राजनैतिक पार्टी बनाने की पूरी रणनीति अवागढ़ हाउस, “CASTLE GRANT” कोठी, आगरा में ही बनाई गई थी। सर्वप्रथम प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी महाराज को जनसंघ का सभापति बनाने पर विचार किया गया लेकिन उन्होंने ये पद लेने से इनकार कर दिया और राव कृष्ण पाल सिंह जी का नाम आगे बढ़ाया, उसके बाद राव कृष्ण पाल सिंह जी (राजा साहब, अवागढ़) जनसंघ के प्रथम अध्य्क्ष बनाये गए, 2 सितंबर 1951 को उत्तर प्रदेशीय जनसंघ की स्थापना हुई, उस समय जनसंघ सिर्फ़ यूपी की एक क्षेत्रीय पार्टी थी जिसके प्रथम अध्यक्ष राजा अवागढ़ राव कृष्ण पाल सिंह जी बने। इसलिए उन्हें प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष न कह कर के जनसंघ का प्रथम अध्यक्ष कहा गया है। उसके बाद पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन हुआ और भारतीय जनसंघ के प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ०श्याम प्रसाद मुखर्जी बने। इस प्रकार राव साहब पार्टी के प्रथम अध्यक्ष और संस्थापक सदस्य थे। बाद में जनसंघ और स्वतंत्र पार्टी ने भाजपा का रूप ले लिया। आज भी आरएसएस और बीजेपी के दफ्तरों में राव साहब तस्वीर लगी हुई है जिसमें उनको जनसंघ के प्रथम अध्यक्ष के रूप में दर्शाया गया है।
राव साहब जलेसर संसदीय सीट से स्वतंत्र पार्टी के प्रत्याशी के रूप में भारत की तृतीय लोकसभा के सदस्य भी रहे। इसके अलावा, वे 12 वर्ष ब्रिटिश काल में एमएलसी रहे। राव साहब एटा जिला पंचायत के अध्यक्ष भी रहे, इसके अलावा वे हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और राजनैतिक क्षेत्र में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रहे। राव साहब का आखिरी वक्त अवागढ़ हाउस “ब्रिज जीवन निवास” डैम्पियर पार्क, मथुरा में कटा, औऱ सन 1975, 24 जनवरी को उनका देहांत हो गया।
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