*कानूनी व अधिकार-आधारित सामाजिक कार्यकर्ता की श्रेणियां*
*1. मानवाधिकार सामाजिक कार्यकर्ता*
– *काम*: NHRC/SHRC में शिकायत दर्ज कराना, पुलिस ज्यादती, हिरासत में मौत, दलित-आदिवासी उत्पीड़न के केस उठाना
– *कहां*: मानवाधिकार आयोग, Amnesty, PUCL जैसे संगठनों के साथ
*2. महिला शोषण एवं जेंडर आधारित हिंसा कार्यकर्ता*
– *काम*: घरेलू हिंसा, दहेज, यौन शोषण, कार्यस्थल पर उत्पीड़न के पीड़ितों की मदद
– *कानून*: घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, POSH Act, दहेज निषेध कानून के तहत केस फाइलिंग, काउंसलिंग, शेल्टर होम तक पहुंचाना
– *कहां*: वन स्टॉप सेंटर, महिला आयोग, महिला हेल्पलाइन 181, NGO
*3. RTI एवं पारदर्शिता कार्यकर्ता*
– *काम*: जनता को सूचना का अधिकार कानून सिखाना, RTI आवेदन डालना, भ्रष्टाचार उजागर करना, सरकारी योजनाओं का सोशल ऑडिट
– *कहां*: स्वतंत्र रूप से या संगठनों जैसे CHRI, MKSS के साथ। ये “व्हिसलब्लोअर सपोर्ट” का भी काम करते हैं
*4. बाल अधिकार कार्यकर्ता*
– *काम*: बाल श्रम, बाल विवाह, POCSO एक्ट के तहत यौन शोषण रोकना
– *कहां*: बाल कल्याण समिति CWC, चाइल्डलाइन 1098, NCPCR
*5. कानूनी सहायता सामाजिक कार्यकर्ता*
– *काम*: गरीबों को मुफ्त वकील दिलाना, जेल में बंद विचाराधीन कैदियों की मदद
– *कहां*: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण DLSA, लीगल एड क्लिनिक
*पूरी लिस्ट अपडेट करके देखें तो मुख्य 4 बड़े प्रकार हुए:*
स्तर उदाहरण
*1. कल्याणकारी/सेवा आधारित** स्वास्थ्य, स्कूल, बुजुर्ग, नशा-मुक्ति कार्यकर्ता
*2. सामुदायिक विकास आधारित** ग्रामीण विकास, शहरी बस्ती, आजीविका कार्यकर्ता
*3. अधिकार एवं कानून आधारित** मानवाधिकार, महिला शोषण, RTI, बाल अधिकार, कानूनी सहायता कार्यकर्ता
*4. नीति एवं प्रशासन आधारित** रिसर्च, योजना निर्माण, CSR, NGO प्रबंधन
*नोट*: RTI कार्यकर्ता और मानवाधिकार कार्यकर्ता कई बार “एक्टिविस्ट” भी कहलाते हैं। इनके पास MSW डिग्री जरूरी नहीं होती, लेकिन कानून और सामाजिक मुद्दों की गहरी समझ चाहिए होती है।
एके बिंदुसार
संस्थापक
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी।







