गेहूं की कटाई के उपरांत फसल अवशेष जलाने पर प्रशासन सख्त, उल्लंघन पर लगेगा जुर्माना व होगी कार्यवाही,उप

निदेशक कृषि द्वारा किसानों से वैकल्पिक उपाय अपनाने की अपील
एटा जिलाधिकारी प्रेमरंजन सिंह के निर्देशों के क्रम में उप कृषि निदेशक सुमित कुमार ने कृषकों से अपील की है कि कोई भी कृषक अपने खेत में गेहूं की कटाई के उपरांत फसल अवशेष न जलाये, अपितु मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करके फसल अवशेष को मिट्टी में दवाये अथवा फसल अवशेष को गौशाला में दान कर दें।
अगर कोई कृषक खेत में फसल अवशेष जलाता है, तो पकड़े जाने पर अर्थदण्ड का निम्न प्रावधान है. 02 एकड़ से कम क्षेत्र के लिए रू० 5000.00, 02 से 05 एकड़ क्षेत्र के लिए रू0 10000.00 और 05 एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए रू० 30000.00 तक पर्यावरण क्षति पूतिपूर्ति की वसूली की जाएगी। पुनरावृत्ति करने पर सम्बन्धित के विरुद्ध विधिक कार्यवाही की जाएगी, यह भी अवगत कराया है, कि पराली अथवा फसल अवशेष जलाने की घटना चाहे किसी भी समय की जाए सेटेलाईट द्वारा रिकार्ड की जाती है पराली जलाने वाला कोई भी कृषक इससे बच नहीं सकता।
उन्होंने कहा कि सभी किसान भाईयों से अपील है. कि पराली / फसल अवशेष को न जलाएं। यदि कोई भी कम्बाइन हार्वेस्टर बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एस०एम०एस०) के गेहूं की कटाई करते हुए पायी जाती है, तो मौके पर ही सीज कर दी जायेगी तथा सम्बन्धित थाने को सुपुर्द कर दी जायेगी।







