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राष्टीय स्वयं सेवक संघ द्वारा सवेरा चित्र मंदिर में विचारोत्तेजक प्रमुख जन गोष्ठी का हुआ आयोजन।

अमित अग्रवाल गिरिडीह झारखंड

गिरिडीह स्थित सवेरा चित्र मंदिर के परिसर में आज एक भव्य एवं विचारोत्तेजक प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गरिमामय कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख श्री राजकुमार मटालेजी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों—शिक्षा, प्रशासन, चिकित्सा, मीडिया एवं सामाजिक जीवन—से जुड़े बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन सम्मिलित हुए।

कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया गया। प्रारंभिक संबोधन में गोपाल शर्मा प्रांत प्रचारक ने इस गोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना समय की आवश्यकता है, ताकि राष्ट्र निर्माण में सभी की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित हो सके।

अपने विस्तृत और प्रेरणादायी उद्बोधन में श्री राजकुमार मटाले ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्षों की यात्रा, उसकी कार्यपद्धति, विचारधारा एवं समाज में उसकी भूमिका पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 1925 में विजयादशमी के पावन अवसर पर एक छोटे से प्रयास के रूप में प्रारंभ हुआ संघ आज एक विशाल सामाजिक-सांस्कृतिक शक्ति के रूप में विकसित हो चुका है।

उन्होंने बताया कि संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के साथ ही पूरे देश में उसके कार्य और विचार को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। पहले जहाँ संघ के बारे में जानकारी सीमित दायरे में ही रहती थी, वहीं आज समाज का सामान्य नागरिक भी संघ के सकारात्मक पक्ष को जानने और समझने के लिए उत्सुक है। उन्होंने कहा कि देशभर में आयोजित हो रहे ऐसे कार्यक्रमों में विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोग बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं और संघ के विचार को प्रत्यक्ष रूप से समझने का प्रयास कर रहे हैं।

श्री मटाले जी ने कहा कि संघ केवल एक संगठन नहीं है, बल्कि यह एक अनुभूति का विषय है। उन्होंने वर्तमान सरसंघचालक के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ को शब्दों में पूर्ण रूप से व्यक्त करना कठिन है, इसे अनुभव के माध्यम से ही समझा जा सकता है।

अपने संबोधन में उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी के जीवन और उनके राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत व्यक्तित्व का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि डॉ. हेडगेवार जी जन्म से ही राष्ट्र के प्रति समर्पित थे। बाल्यकाल से ही उनके मन में देशभक्ति की भावना प्रबल थी। उन्होंने अंग्रेजों के शासनकाल में भारतीय समाज और संस्कृति पर पड़े प्रभाव को निकट से देखा और अनुभव किया, जिससे उनके मन में राष्ट्र के पुनर्निर्माण का संकल्प जागृत हुआ।

उन्होंने आगे बताया कि डॉ. हेडगेवार जी ने अपने जीवन के अनुभवों से यह निष्कर्ष निकाला कि भारत की पराधीनता का मुख्य कारण समाज की असंगठित स्थिति थी। जाति, पंथ, भाषा और क्षेत्र के आधार पर विभाजित समाज को संगठित किए बिना राष्ट्र की स्वतंत्रता और उन्नति संभव नहीं है। इसी विचार के आधार पर उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की, जिसका मूल उद्देश्य समाज को संगठित करना और राष्ट्र को सशक्त बनाना है।

श्री मटाले जी ने संघ की कार्यपद्धति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ ने व्यक्ति निर्माण को केंद्र में रखा है। शाखा के माध्यम से अनुशासन, संस्कार, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित की जाती है। आज देशभर में हजारों शाखाएँ संचालित हो रही हैं, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रही हैं।

उन्होंने कहा कि संघ ने हमेशा सामान्य व्यक्तियों की शक्ति पर विश्वास किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाज परिवर्तन के लिए किसी विशेष वर्ग या व्यक्तियों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है।

अपने उद्बोधन में उन्होंने “पंच परिवर्तन” के संकल्प का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर समाज के समक्ष पाँच महत्वपूर्ण विषयों को रखा गया है—

कुटुंब प्रबोधन
सामाजिक समरसता
पर्यावरण संरक्षण
स्व का बोध
नागरिक कर्तव्य बोध

उन्होंने बताया कि कुटुंब प्रबोधन के अंतर्गत परिवार को संस्कारों का केंद्र बनाने पर बल दिया गया है, जहाँ बच्चों में नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों का विकास हो। सामाजिक समरसता के माध्यम से जाति और भेदभाव से ऊपर उठकर एकता और बंधुत्व की भावना को सुदृढ़ करने का आह्वान किया गया है।

पर्यावरण संरक्षण के विषय में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जीवनशैली को प्रकृति के अनुकूल बनाना अत्यंत आवश्यक है। जल, वन, भूमि और ऊर्जा के संतुलित उपयोग से ही सतत विकास संभव है।

‘स्व’ के बोध पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों के प्रति गर्व की भावना विकसित करना आवश्यक है। साथ ही नागरिक कर्तव्य बोध के अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति को अपने दायित्वों के प्रति सजग रहकर समाज और राष्ट्र के हित में कार्य करने का संकल्प लेना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि संघ केवल तात्कालिक मुद्दों पर कार्य करने वाला संगठन नहीं है, बल्कि यह दीर्घकालिक दृष्टि से राष्ट्र निर्माण में लगा हुआ है। संघ का कार्य शताब्दियों की योजना के साथ चलता है और इसका उद्देश्य एक सशक्त, संगठित और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण करना है।

कार्यक्रम में क्षेत्र सेवा प्रमुख त्रिवेणी जी ,प्रांत सेवा प्रमुख मुकेश रंजन जी, विभाग प्रचारक श्री आशुतोष जी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इसके अतिरिक्त समाज के विभिन्न क्षेत्रों से अनेक प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित रहे, जिनमें केसरी नंदन ,शिव गौरव पांडे ए, सोनू गुप्ता सुजीत भदानी, अमित कुमार, संजीव कुमार ,अनूप यादव ,दिवाकर पांडे, प्रदीप जैन ,राजेश शर्मा, विनोद केसरी, विक्रम पांडे ,सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की सहभागिता रही।

कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित जनों ने विभिन्न विषयों पर अपने प्रश्न रखे और सुझाव प्रस्तुत किए। श्री राजकुमार मटाले ने सभी प्रश्नों का सरल एवं सारगर्भित उत्तर देते हुए संवाद को और अधिक सार्थक बनाया।

Shakeer Akhtar
Author: Shakeer Akhtar

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