रिपोर्ट: सत्यदेव पांडे ( ब्यूरो चीफ- सोनभद्र)
चोपन/सोनभद्र– मुहर्रम की चांद की पहली तारीख से दसवीं तारीख तक जिक्रे या हुसैन के छठी तारीख़ सोमवार को बकरिदिया इस्लामिया स्कूल इमाम चौंक पर हुसैनी कमेटी द्वारा “ज़िक्र-ए-या हुसैन” की महफ़िल का आयोजन किया गया। महफ़िल में मौलाना शगीर अहमद क़िब्ला ने कर्बला के शहीदों, विशेषकर इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफ़ादार साथियों की कुर्बानियों को याद किया। वही हाफीज व कारी शेराज अहमद हस्सानी और दिगर
उलेमा-ए-किराम ने अपने ख़िताब में कहा कि कर्बला का पैग़ाम इंसानियत, सच्चाई, इंसाफ़ और ज़ुल्म के ख़िलाफ़ डटकर खड़े होने का संदेश देता है। उन्होंने बताया कि इमाम हुसैन (अ.स.) ने दीन और इंसानियत की हिफाज़त के लिए अपनी और अपने परिवार की बेमिसाल कुर्बानी पेश की, जो क़यामत तक इंसानियत के लिए मिसाल बनी रहेगी।
महफ़िल में नौहाख़्वानी और मर्सियाख़्वानी भी हुई जिसमें उपस्थित अकीदतमंदों की आँखें नम हो गईं। कार्यक्रम के अंत में मुल्क में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई। कार्यक्रम का सफल संचालन जामा मस्जिद के पेश इमाम रमजान कादरी ने किया।
इस अवसर पर जामा मस्जिद के सदर हाजी शरफराज अहमद, नाजिम खान,अंजुमन सेक्रेटरी महफूज़ आरीफ ,हाजी ग्यासुद्दीन, नजमुद्दीन ईदरिशी, उमरान अहमद, चिराग अली, सरफुद्दीन ईदरीशी, अकबर अली,सरवर कुरैशी,इरसाद अहमद,व हुसैनी कमेटी के मेम्बरान व पर्दा नसी मां बहने मौजूद रही और “लब्बैक या हुसैन” की सदाओं से पूरा माहौल गूंज उठा।









