विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिबंध के बाद भी भारत की फसलों में प्रयुक्त किए जा रहे हैं यह हानिकारक केमिकल्स

*विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिबंध के बाद भी भारत की फसलों में प्रयुक्त किए जा रहे हैं यह हानिकारक केमिकल्स*

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कड़ी चेतावनियों और कई देशों में प्रतिबंध के बावजूद, भारत में कृषि और बागवानी में

कई अत्यंत हानिकारक रसायनों का खुलेआम उपयोग हो रहा है,

और इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारे देश में पके हुए आम के फलों को विदेशी देश नहीं खरीद रहे हैं l

 

खैर पहले बात करेंगे जहर की जो हम सब्जियों,फसलों और फलों में भर रहे हैं, जिनको विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने प्रतिबंधित किया हुआ है, लेकिन हम और हमारा परिवार उसको लगातार खा रहे हैं l

 

कमजोर नियमों और आर्थिक फायदों के कारण ये जहर आज भी हमारी थाली तक पहुंच रहे हैं, और धड़ल्ले से प्रयोग किए जा रहे हैं l

 

*1.*ग्लाइफोसेट*(Glyphosate-यह एक प्रमुख रूप से इस्तेमाल होने वाला खरपतवार नाशक है।WHO की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने 2015 में इसे ‘संभावित कैंसरकारी’ (संभावित रूप से कैंसर पैदा करने वाला) घोषित किया था।स्थिति: कई देशों (जैसे फ्रांस, वियतनाम आदि) में इस पर प्रतिबंध है, लेकिन भारत में यह अभी भी उपयोग किया जा रहा है।

 

*2. पैराक्वाट डाइक्लोराइड* (Paraquat Dichloride) – यह एक अत्यंत विषैला और शक्तिशाली खरपतवार नाशक है।इसके संपर्क में आने से गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं और श्वसन संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। इसका कोई ज्ञात एंटीडोट भी नहीं है। दुनिया के 74 से अधिक देशों ने इसे बैन कर रखा है, लेकिन भारत के खेतों में यह अभी भी आसानी से उपलब्ध है।

 

*3. क्लोरपाइरीफॉस* (Chlorpyrifos)-

यह क्या है: यह कीटों को मारने के लिए फसलों में छिड़का जाने वाला एक व्यापक कीटनाशक है। यह मानव मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचाता है, विशेष रूप से बच्चों के विकास पर बुरा असर डालता है।स्टॉकहोम कन्वेंशन में इसे खतरनाक मानने के बावजूद, भारत ने इसके पूर्ण प्रतिबंध का विरोध किया है और यह अभी भी फसलों में प्रयोग हो रहा है।

 

*4.कैल्शियम कार्बाइड*

(Calcium Carbide) – इसे सामान्य बोलचाल की भाषा में कार्बेट कहते हैं l इसका उपयोग आम, पपीता और केले जैसे फलों को कृत्रिम रूप से जल्दी पकाने के लिए किया जाता है।यह रसायन मानव शरीर में गंभीर विष (टॉक्सिन्स) पैदा करता है और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण बनता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) और WHO द्वारा इस पर पूर्ण प्रतिबंध है, लेकिन अनधिकृत रूप से फल विक्रेता व्यापारी और आम जनता आज भी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।इन खतरनाक रसायनों के अंधाधुंध इस्तेमाल से न केवल किसानों का स्वास्थ्य दांव पर लगा है, बल्कि उपभोक्ताओं को भी गंभीर बीमारियां होने का खतरा है।

 

अब यह जहरीले रसायन बाजार में क्यों बिक्री किए जा रहे हैं तो इसका सीधा सा जवाब है सरकार की कमजोर और निकम्मी नीतियां जिन्हें दूध तो जहरीला दिख जाता है लेकिन फल जहरीले नहीं दिखते, नकली पनीर दिख जाता है लेकिन जहर भरे फल नहीं दिखते l

 

भारत को इस समय जनसंख्या रोधी कानून की बहुत जरूरत है , लेकिन पक्ष विपक्ष का कोई भी नेता इस पर नहीं बोल रहा है क्योंकि सबको वोट चाहिए l

 

बढ़ती हुई आबादी को कहां तक प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे ?

 

खैर पहले जहर को खाइए और फिर कैंसर का उपचार कराइये

क्योंकि सरकार का कहना है हमने विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं तैयार करनी है और उनका पूरा उपयुक्त तभी हो पाएगा जब हमको और आपको कैंसर हो जाएगा l

 

 

नीचे दो बातें लिख रहा हूं इनको स्वीकार कीजिए –

 

*1. पूरे विश्व के सबसे निकम्मे और भ्रष्ट नेता हमारे देश में हैं, जो वोट के लिए सही बात नहीं कह सकते और गलत का विरोध नहीं कर सकते l*

 

*2. नेता किसी का न होता (इसलिए अपने परिवार को इन नेताओं से दूर रखिए क्योंकि इनकी गंदी नजर आपकी बहन बेटी पर हो सकती है)*

 

 

*पवन चतुर्वेदी*

जिलाध्यक्ष

प्रोग्रेसिव जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन

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