डॉ. चंद्रकांत ने मुस्कुराते हुए देवेंद्र का हाथ थामा और कहाःरिपोर्ट डॉ राहुल शर्मा

फिरोजाबाद की तपती दोपहर में नगला चूरा के रहने वाले देवेंद्र के जीवन में केवल निराशा का अंधेरा था। उनके दोनों घुटने गठिया (आर्थराइटिस) के कारण पूरी तरह टेढ़े हो चुके थे। चलना तो दूर, उनका उठना-बैठना भी एक सजा जैसा बन गया था। उन्होंने शहर के तीन-चार बड़े निजी डॉक्टरों के चक्कर काटे, लेकिन हर जगह से उन्हें निराशा ही हाथ लगी। हर प्राइवेट डॉक्टर ने भारी-भरकम खर्च का डर दिखाते हुए उन्हें सीधे आगरा रेफर कर दिया था।

 

निजी अस्पतालों की तंग गलियों और मोटी रकम की मांग से थककर, देवेंद्र ने आखिरकार सरकारी सिस्टम पर भरोसा करने की सोची और वह राजकीय मेडिकल कॉलेज, फिरोजाबाद के ऑर्थोपेडिक विभाग में पहुंचे।

उम्मीद की पहली किरण

 

वहां उनकी मुलाकात डॉ. चंद्रकांत गौतम से हुई। डॉ. चंद्रकांत ने जब देवेंद्र के घुटनों के एक्स-रे (जैसा कि गंभीर स्थिति दिखाई देती है) को देखा, तो स्थिति वाकई चुनौतीपूर्ण थी।

 

लेकिन डॉक्टर की आंखों में एक अलग ही चमक और आत्मविश्वास था।

 

डॉ. चंद्रकांत ने मुस्कुराते हुए देवेंद्र का हाथ थामा और कहाः

 

“देवेंद्र जी, अब आपको आगरा या सैफई भागने की कोई जरूरत नहीं है। बड़े-बड़े प्राइवेट अस्पताल जो नहीं कर पाए, वो ऑपर

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