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मिर्जापुर में शौचालय घोटाले को उजागर करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता को मिल रही धमकी –

*मिर्जापुर में शौचालय घोटाले को उजागर करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता को मिल रही धमकी – क्षेत्राधिकारी चुनार ने एसपी को भेजी आख्या, हाईकोर्ट में होगी अहम सुनवाई*

 

* IGRS संख्या 40019926018060 पर हुई जांच में बड़े खुलासे की आशंका, पोनी गांव के विजेंद्र बहादुर सिंह ने कहा – भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी

 

*मिर्जापुर।* उत्तर प्रदेश के जनपद मिर्जापुर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत मिलने वाली शौचालय अनुदान राशि में बड़े पैमाने पर धांधली का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घोटाले को उजागर करने वाले ग्राम पौनी, थाना अदलहाट निवासी सामाजिक कार्यकर्ता विजेंद्र बहादुर सिंह पुत्र स्व. रामफल सिंह* को लगातार धमकियां मिल रही हैं।

 

इस पूरे प्रकरण में अब एक नया मोड़ आ गया है। क्षेत्राधिकारी चुनार द्वारा इस मामले में जांच आख्या तैयार कर पुलिस अधीक्षक मिर्जापुर को प्रेषित की गई है, जिसमें आवेदक द्वारा लगाए गए आरोपों का विस्तृत विवरण दिया गया है।

 

क्या है पूरा मामला – 18 हजार की जगह 6 हजार का खेल।

 

प्राप्त दस्तावेजों और IGRS संदर्भ संख्या 40019926018060 के अनुसार, आवेदक विजेंद्र बहादुर सिंह ने आरोप लगाया है कि उनकी ग्राम पंचायत पोनी में शौचालय निर्माण हेतु सरकार द्वारा प्रति लाभार्थी 18000/- रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर लाभार्थियों को केवल 6000/- रुपये ही देकर खानापूर्ति कर दी गई।

 

जब सामाजिक कार्यकर्ता ने इस अनियमितता के खिलाफ आवाज उठाई और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की तो कोई सुनवाई नहीं हुई। अंततः थक-हार कर उन्हें माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की शरण लेनी पड़ी।

 

आवेदक द्वारा इस संबंध में दो याचिकाएं दाखिल की गई हैं –

1. जनहित याचिका संख्या – 2903/2028

2. रिट याचिका संख्या – 11814/2018

 

वर्तमान में दोनों मामले माननीय न्यायालय में विचाराधीन हैं। रिट याचिका संख्या 11814/2018 में माननीय न्यायालय ने अगली सुनवाई हेतु तिथि नियत की है।

 

शिकायत के बाद शुरू हुआ उत्पीड़न का दौर – लेखपाल पर भी गंभीर आरोप।

 

आवेदक का कहना है कि जब से उन्होंने न्यायालय में याचिका दाखिल की है, तब से ही गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा उन्हें लगातार डराया-धमकाया जा रहा है।

 

पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि – “मेरे द्वारा शौचालय की याचिका में उक्त न्यायालय में बाद योजित किया गया है, तब से विपक्षी द्वारा धमकी दी जा रही है।”

 

सिर्फ इतना ही नहीं, आवेदक ने ग्राम समाज की जमीन पर हो रहे अवैध कब्जों के खिलाफ भी आवाज उठाई थी। आवेदक का आरोप है कि ग्राम सभा की जमीन को बचाने के लिए शौचालय का निर्माण 18 हजार में करने के लिए जब उन्होंने पहल की, तो राजस्व विभाग के हल्का लेखपाल द्वारा भी उन्हें धमकाया गया और उनके उत्पीड़न का प्रयास किया गया।

 

आवेदक ने अपने प्रार्थना पत्र में लिखा है कि – “मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता हूं, मेरे द्वारा ग्राम समाज पौनी के लोगों को शौचालय का 18 हजार रुपया न मिलने के संबंध में व सबसे महत्वपूर्ण विषय जिला पंचायत राज अधिकारी के द्वारा अपने ही काउंटर में यह दावा किया गया है कि 270 लाभार्थियों के खाते में पैसा आरटीजीएस द्वारा ट्रांसफर कर दिया गया है जबकि जांच करने पर यह पता चला है की मात्रा 100 लोग को का नाम केवल बैंक स्टेटस में शो कर रहा है खाता नंबर नहीं शो कर रहा है जबकि 170 लोगों के खाते में पैसा ट्रांसफर किया ही नहीं गया है और तो और इसमें बहुत से नौकरी वालों के परिवारों को भी पैसा दिया गया है कुछ नौकरी स्वयं करने वालों को भी दिया गया है वह बिना नाम का चेक काटी गई है जिला पंचायत राज अधिकारी के काउंटर का जवाब हमारे द्वारा 24 8 2026 को लगा दिया गया है इस पर फाइनल हियरिंग चल रहा है माननीय न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दाखिल की गई है, जिसके कारण विपक्षी रंजिश मान रहे हैं।”

 

इस भय के माहौल को देखते हुए उन्होंने पुलिस से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126/135 के तहत निरोधात्मक कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई अप्रिय घटना न घटे।

 

क्षेत्राधिकारी चुनार की आख्या और आगे की कार्रवाई।

 

इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी क्षेत्राधिकारी चुनार की आख्या है।

 

दिनांक 10 जुलाई 2026 को क्षेत्राधिकारी चुनार (जटाशंकर मिश्र) द्वारा पुलिस अधीक्षक, जनपद मिर्जापुर को संबोधित एक आख्या पत्र प्रेषित किया गया है।

 

पत्र में उन्होंने स्पष्ट लिखा है –

“आख्या सादर अवलोकनार्थ सेवा में प्रेषित है।”

 

इस आख्या में IGRS के सभी 5 बिंदुओं पर रिपोर्ट लगाई गई है –

1. आवेदक का नाम-पता – विजेंद्र बहादुर सिंह, पौनी, अदलहाट

2. प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने हेतु शिकायत का संक्षिप्त विवरण – जिसमें शौचालय घोटाले और धमकी का पूरा विवरण है

3. प्रार्थना पत्र पर अभी तक FIR दर्ज न किए जाने का कारण – उपरोक्तानुसार

4. पुलिस अधिकारी द्वारा की गई कार्यवाही का विवरण – उपरोक्तानुसार

5. अन्य आवश्यक तथ्य – निल

 

अब गेंद पुलिस अधीक्षक मिर्जापुर के पाले में है। सामाजिक कार्यकर्ता ने एसपी से मांग की है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषी प्रधान, सचिव और संबंधित लेखपाल के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए।

 

बड़ा सवाल – क्या उच्च न्यायालय द्वारा होगा न्याय?

 

अब सभी की निगाहें अग्रीम तिथि 13/10/2026 इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। यदि न्यायालय में यह सिद्ध हो जाता है कि 18 हजार की जगह 6 हजार दिया गया है, तो यह पूरे मिर्जापुर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक बड़ा घोटाला साबित होगा।

 

भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी इस मामले पर नजर बनाए हुए है और पीड़ित को न्याय दिलाने तक अपनी आवाज बुलंद रखेगा।

 

रिपोर्ट – धर्मदेव ठाकुर

*BMF NEWS NETWORK*

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