नयन में सागर है वरना अश्रु नमकीन नहीं होते….. अजय अटल
बाह आगरा. नयन में सागर है वरना अश्रु नमकीन नहीं होते
कंठ में करुणा है वरना गीत गमगीन नहीं होते शब्द जिस कवि सम्मेलन में डॉक्टर अजय अटल के श्री मुख से सुनने कों मिले वह कवि सम्मेलन अपने आप में सफलता की सीढ़ी चढ़ जाता है. यह आयोजन विनोद सांवरिया के संयोजन में दीक्षित पैलेस, बाह आगरा में साहित्य संगम के बैनर आयोजित स्व: रामनाथ दीक्षित स्मृति अखिल भारतीय कवि सम्मेलन भव्यता के साथ सपन्न हुआ।
नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष श्री दिवाकर सिंह गुर्जर जी की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम का संचालन धौलपुर से आए कवि पदम गौतम जी ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यक्रम अध्यक्ष दिवाकर सिंह गुर्जर एवं सुधीर दुबे जी ने सरस्वती दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण कर किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ वीरेश राज शर्मा (वरिष्ठ जेल अधीक्षक, मेरठ) ने स्व: रामनाथ दीक्षित की स्मृतियों को नमन किया।
कार्यक्रम में आए हुए सभी कवियों का दीक्षित परिवार द्वारा स्वागत किया गया, अतिथियों डॉ. वीरेश शर्मा, हरिओम पांडेय, सुधीर दुबे, देवेंद्र शर्मा, पवन टाइगरका स्वागत शिव प्रकाश दीक्षित, चंद्रप्रकाश दीक्षित, अजय दीक्षित, अंकित दीक्षित, खुशबू दीक्षित ने सामूहिक रूप से किया।
सरला गुर्जर जी का स्वागत सीमा राजपूत एवं रीना सक्सेना जी द्वारा किया गया।
कवियों ने देश प्रेम एवं हास्य के साथ सामाजिक समरसता पर एवं प्रेम पर आधारित कविताओं से कवि सम्मेलन में अनूठे रंग भर दिए।
दोपहर 12 बजे शुरू हुआ कार्यक्रम शाम 5.45 तक चला, कार्यक्रम हॉल श्रोताओं से खचाखच भरा रहा।
देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कवियों में, अंतरराष्ट्रीय कवि अजय अटल(एटा), पदम गौतम (धौलपुर), संध्या त्रिपाठी (लखनऊ),जय कुमार जय (भरतपुर), विपिन चौहान मन (आगरा), अवनीश त्रिपाठी (इटावा), योगेश चौहान (लखनऊ), रजनीश त्रिपाठी (इटावा) के साथ क्षेत्रीय कवियों में विनोद सांवरिया, हरि नारायण नमन, मान सिंह मनहर, राहुल परिहार, ब्रजेश सिंह ने भी काव्य पाठ किया।
काव्यांश
प्रेम का किरदार बौना हो नहीं सकता
प्रीत सा बहुमूल्य सोना हो नहीं सकता
कीमती से कीमती बिस्तर पे सो लेना
माँ के आँचल सा बिछौना हो नहीं सकता
– पदम गौतम
होने लगे ज्यों ये कांड आई एक नई डिमांड ।
ब्याह पहले ऐड पेपर में आप लगवाइए ।
चिपके छुपे हुए कॉकरोच जैसे प्रेमी ,
ऐतराज हो तो उसे पहले ही बताइए ।
– जय कुमार जय ( हास्य कवि, भरतपुर राज)
बीच में पहुंचेगी कश्ती जब उतर जाऊंगा मैं
इस अदा से देखना दरिया में भर जाऊंगा मैं
आप कातिल मत कहो उसको कहां ये इल्म था
वो नज़र फेरेगा मुझ से और मर जाऊंगा मैं
– विपिन चौहान मन।
नयन में सागर है वरना अश्रु नमकीन नहीं होते
कंठ में करुणा है वरना गीत गमगीन नहीं होते
-डॉ अजय अटल
अंतर्राष्ट्रीय गीतकार कासगंज
देश के युवाओं को, फिर जगा के आए हैं।
थोड़ी दूर तक रास्ता हम दिखा के आए हैं।
बोलते थे जो अक्सर हम झुका नहीं करते,
Zen z की महफिल में सर झुका के आए हैं।
– विनोद सांँवरिया
तुम्हारे गिफ्ट मुंह पर उछाल देती तो क्या करते,
घर से बेइज्जत करके निकाल देती तो क्या करते ,
नम्बर ब्लैकलिस्ट में ही तो डाला है गनीमत है
कहीं नीले वाले ड्रम में डाल देती तो क्या करते …
– कवि अवनीश त्रिपाठी
जहां ज्ञान विज्ञान ध्यान अध्यात्म शक्ति और योग है
योग भोग के बीच संतुलन का अद्भुत संयोग है
वेद उपनिषद और पुराणों से जिसकी पहचान है
ऋषि मुनियों का अमर देश यह भारत वर्ष महान है
– रजनीश त्रिपाठी
–
राधा किशन की कहानी लिखो तुम
मोहब्बत की नूतन रवानी लिखो तुम
पियूंगी हलाहल बड़े प्रेम से मैं
मुझे अपनी मीरा दीवानी लिखो तुम
– संध्या त्रिपाठी
कार्यक्रम में रामसेवक शर्मा (पूर्व प्रधानाचार्य), विनोद दीक्षित (प्रधानाचार्य), देवेन्द्र शर्मा, देवेन्द्र मिश्रा, संजू तिवारी(पूर्व जिला पंचायत सदस्य), शिव शंकर बौहरे (प्रबंधक, आशाराम रामनिवास आदर्श कॉलेज), दयाशंकर बौहरे, उमेश मिश्रा, रवि कांत मिश्रा एड, प्रशांत राजपूत एड, अखिलेश तिवारी, राजू यादव, संतोष बरुआ, धर्मवीर गुर्जर, सुखवीर गुर्जर, आलोक यादव,अजय कुशवाह,नरेंद्र भारतीय, मतीश यादव, शिव कुमार बौद्ध, महाराज सिंह भारतीय, पं. ब्रजेश शास्त्री पुरोहित, किताब सिंह, ललित महेरे, राजीव शर्मा, अंकुर विधौलिया, महेश वर्मा, किशोरी लाल चक, वसीम पठान, अवधेश महेरे
सीमा राजपूत, किरन राजपूत, रीना सक्सेना, मनीष राजपूत, बंटी राजपूत, रामचंद्र राजपूत, दयानन्द आदि लोग उपस्थित रहे।
















