*ऑटिज्म पीड़ित बच्चों को मिलेगी निशुल्क केयर*
*आद्यान्त फाउन्डेसन की दूसरी यूनिट का शुभारम्भ, विशेष बच्चों के लिए बढ़ेगा सहयोग का दायरा*
आगरा। ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों को बेहतर सहयोग, मार्गदर्शन एवं समावेशी वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में आद्यान्त फाउंडेशन फॉर ऑटिज्म की दूसरी इकाई का भव्य शुभारंभ सोमवार को मनस नगर स्थित केंद्र में किया गया। जिसका शुभारम्भ समाजसेवी डॉ. कुलदीप सिंह व रंजीत सामा ने रिबन काटकर दीप प्रज्जवलित कर किया। कहा कि ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों को उनकी जरूरतों के अनुरूप सहयोग और निरंतर मार्गदर्शन मिलना आवश्यक है। प्रत्येक बच्चे की क्षमताएं और आवश्यकताएं अलग होती हैं, इसलिए उनके विकास के लिए संवेदनशील एवं व्यक्तिगत दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। नई इकाई शुरू होने से ऐसे बच्चों और उनके परिवारों को सेवाओं तक पहुंच बनाने में सुविधा मिलेगी।
120, मनस नगर, सी टीवी के निकट, शाहगंज, आगरा स्थित नई इकाई का उद्घाटन समारोह में केन्द्र संचालिका डॉ. रेनू तिवारी व नीरज तिवारी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आद्यान्त फाउंडेशन फॉर ऑटिज्म का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को निशुल्क बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके परिवारों को भी आवश्यक सहयोग प्रदान करना है। नई इकाई के माध्यम से बच्चों के विकास, उनकी क्षमताओं को पहचानने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों को और गति मिलेगी। बताया कि डे केयर, स्कूलिंग के साथ थैरपी में स्पीच,आक्यूपेशन, स्पेशल एजूकेशन,बिहेवियर थैरपी, सेन्सर इंटीग्रेशन थैरपी, लैंग्वेज एंड कम्यूनिकेशन थेरपी जैसी सभी सुविधाएं होंगी। इस अवसर पर अभिभावकों ने भी अपने अनुभव साझा किए। कहा कि ऑटिज्म से जुड़े बच्चों के लिए सही मार्गदर्शन और सहयोग मिलने से उनके विकास की संभावनाएं बेहतर होती हैं। कार्यक्रम में फाउंडेशन की आगामी योजनाओं और विशेष बच्चों के लिए किए जाने वाले प्रयासों पर भी चर्चा हुई।
इस अवसर पर मुख्य रूप से संरक्षक पंकज तिवारी, अध्यक्ष रिदम तिवारी, धीरज कुमार बाधव, सतेन्द्र, अश्विनी श्रीवास्तव, माया श्रीवास्तव, डॉ. प्रियंका मैसी, डॉ. राजीव पचौरी, डॉ. सतीश शुक्ला, डॉ. शिवानी गोयल, डॉ. राजीव गोयल, डॉ. शिवालिका शर्मा, डॉ. मनु, डॉ. रीतेश बंसल, डॉ. अंशु बंसल, डॉ. अनुरंजन, सतेन्द्र तिवारी, दीक्षा, पायल, अंजली, वंशिका, सृष्टि पूजा, लवी, मोहिनी, स्नेहा आदि उपस्थित थे।















