मीडिया: पत्रकारिता और सामाजिक सक्रियता की ‘जननी’* समाज का आधार स्तंभ

*मीडिया: पत्रकारिता और सामाजिक सक्रियता की ‘जननी’*
समाज का आधार स्तंभ

एके बिंदुसार
संस्थापक
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी नई दिल्ली।

किसी भी जीवंत लोकतंत्र में यदि समाज को एक विशाल वृक्ष माना जाए, तो ‘मीडिया’ उसकी वह मुख्य जड़ है, जिससे पूरी व्यवस्था को जीवन मिलता है। इसी जड़ से ‘पत्रकारिता’ का तना विकसित होता है और ‘सामाजिक कार्यकर्ता’ की शाखाएं विस्तार पाती हैं। बिना इस जड़ के, न तो सच की गूँज सुनाई देगी और न ही न्याय का संघर्ष फलीभूत होगा।

1. मीडिया: वह कोख जहाँ से ” चेतना का जन्म होता है
जैसा कि आपने संकेत दिया, पत्रकार की ‘पैनी दृष्टि’ और सामाजिक कार्यकर्ता के ‘संघर्ष’ के मिलन से जिस नई सोच का जन्म होता है, वह समाज की ‘मानसिक चेतना’ है। अर्थात सामाजिक चेतना— और अन्याय के खिलाफ महायुद्ध का रूप भी ले लेती है।
मीडिया वह पवित्र धर्म है जो इस चेतना को पालती है और उसे समाज में बदलाव लाने के योग्य बनाती है।
2. सूचना की जड़ ही शक्ति का स्रोत है
मीडिया केवल समाचारों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह वह मूल आधार (Main Root) है जहाँ से:
पत्रकार को तथ्य मिलते हैं: जो उसकी कलम को धार देते हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता को दिशा मिलती है: जो उसके आंदोलन को आधार प्रदान करती है।
जब तक मीडिया रूपी जड़ मज़बूत है, तब तक समाज का कोई भी वर्ग अपने आप को असुरक्षित महसूस नहीं करेगा।
3. जब जड़ें बोलती हैं, तो सिंहासन डोलते हैं
पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता दोनों का अस्तित्व मीडिया की निष्पक्षता पर टिका है। मीडिया वह माध्यम है जो एक साधारण व्यक्ति को ‘असाधारण नायक’ में बदल देता है। यदि मीडिया अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हुए ‘सवाल पूछने’ की परंपरा को जीवित रखता है, तभी पत्रकार निर्भीक होकर लिख पाता है और सामाजिक कार्यकर्ता निडर होकर लड़ पाता है।
हमारा संकल्प: जड़ को सींचना होगा
आज ज़रूरत इस बात की है कि हम मीडिया रूपी इस मुख्य जड़ को ‘सत्य, साहस और नैतिकता’ के पानी से सींचें। यदि जड़ सुरक्षित है, तो पत्रकारिता का तना भी मज़बूत होगा और सामाजिक सेवा की शाखाएँ भी पूरे समाज को न्याय की शीतल छाया प्रदान करेंगी।

“जहाँ मीडिया की जड़ें गहरी होती हैं, वहाँ लोकतंत्र का वृक्ष कभी नहीं सूखता।”
पत्रकार शोर मचाकर दुनिया को जगाता है, और सामाजिक कार्यकर्ता हाथ पकड़कर चलना सिखाता है। इन दोनों का संगम ही वह ‘मानसिक चेतना’ है जो आने वाले कल का सुनहरा भविष्य लिखेगी।
सजग भारत। सशक्त मीडिया। समृद्ध समाज।

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